उच्च न्यायालय ने मप्र सरकार से अस्पतालों का ब्योरा मांगा

मध्यप्रदेश में जगह-जगह निजी अस्पताल व चिकित्सा केंद्र स्थापित कर लिए गए हैं। लेकिन इनकी वैधानिकता को लेकर हमेशा सवाल उठाए जाते रहे हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच के संयोजक डॉ़ पी़ जी़ नागपांडे ने एक जनहित याचिका दायर कर ऐसे गैर कानूनी अस्पतालों व चिकित्सा केंद्रों पर सवाल खड़ा किया है।

डॉ़ नागपांडे ने आईएएनएस को बताया कि पिछले दिनों मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने राज्य में 225 अस्पतालों व 2758 चिकित्सा केंद्रों को गैरपंजीकृत बताया था। लेकिन वह यह नहीं बता पाई कि ऐसे अस्पतालों व चिकित्सा केंद्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए़ क़े पटनायक व न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश में संचालित निजी अस्पतालों व चिकित्सा केंद्रों का विस्तृत ब्योरा देने का सरकार को निर्देश जारी किया। मामले की अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।

राज्य सरकार ने नर्सिग होम अधिनियम 2006 में हाल ही में संशोधन किया था। संशोधन के मुताबिक अस्पतालों व चिकित्सा केंद्रों में निर्धारित मापदंडों के अनुसार सुविधाएं होनी चाहिए। साथ ही उनका पंजीयन भी आवश्यक है। तय मापदंडों को न पूरा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।

नागपांडे ने बताया कि अकेले जबलपुर में ही 300 अस्पताल व चिकित्सा केंद्र चलते हैं। इनमें से मात्र 50 प्रतिशत ही पंजीकृत हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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