स्लमडॉग. की कहानी लेखक के जेहन में इलाहाबाद प्रवास के दौरान कौंधी थी
इलाहाबाद प्रवास के दौरान राजनयिक विकास स्वरूप के जेहन में यह कहानी कौंधी थी। इस कहानी पर आधारित फिल्म ने बेहद प्रतिष्ठित गोल्डन ग्लोब पुरस्कार अपने नाम कर दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी हैं।
इलाहाबाद में जन्मे और पले-बढ़े स्वरूप छात्र जीवन से ही क्विज में गहरी दिलचस्पी लेते रहे हैं। राजनयिक जिम्मेवारी से कुछ समय तक दूर रहकर उन्होंने अमिताभ बच्चन द्वारा छोटे परदे पर पेश 'कौन बनेगा करोड़पति' से प्रेरित होकर एक उपन्यास लिखने की योजना बनाई। इलाहाबाद में फुर्सत के क्षणों में उनके दिमाग में यह कहानी कौंधी। यह अलग बात है कि 'क्यू एंड ए' नामक इस उपन्यास को लिखने का मौका उन्हें लंदन प्रवास के दौरान ही मिला। इसी पुस्तक को केंद्र में रखकर यह फिल्म तैयार की गई।
स्वरूप की सफलता ने विदेश सेवा के अधिकारियों की कल्पना को प्रभावित किया है। एक राजनयिक ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "स्वरूप की सफलता से हम गौरवान्वित हैं।" पूर्व विदेश सचिव ललित मानसिंह स्लमडॉग की सफलता को भारत की सफलता की कड़ी मानते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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