बांग्लादेश में मुजीब हत्याकांड में राजनयिक पर चलेगा मुकदमा (लीड-1)
प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार में विदेश मामलों के कनिष्ठ मंत्री हसन महमूद ने रविवार को साक्षात्कार में कहा, "इस राजनयिक को वापस बुलाया जाएगा और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।" पूर्व सैनिक खैरुज्जमां उन 28 लोगों की जमात में थे जिन पर मुजीब की हत्या करने का आरोप है। एक सैन्य तख्तापलट को अंजाम देकर मुजीब और उनके परिवार के कई सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया गया था। इस सनसनीखेज कांड को 15 अगस्त, 1975 को अंजाम दिया गया था।
खैरुज्जमां को खालिदा जिया के कार्यकाल में उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। महमूद ने बीडी न्यूज24 डॉट कॉम से बातचीत में कहा, "इस राजनयिक को हटाए जाने के मसले पर मंथन हो चुका है। उन्हें जल्द ही कानून का सामना करना पड़ेगा। यह दुख की बात है कि ऐसे व्यक्ति को यह सम्मानित पद दिया गया जिस पर देश के संस्थापक की हत्या में शामिल होने का आरोप है।"
हसीना के पूर्ववर्ती कार्यकाल में भी खैरुज्जमां के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई थी, लेकिन खालिदा के कार्यकाल के दौरान उन्हें जेल से रिहाकर उच्चायुक्त बना दिया गया।
उधर, ब्रिटेन और अमेरिका ने खालिदा जिया के पुत्र अराफात रहमान कोको और कुछ मंत्रियों को रिश्वत के तौर पर दी गई 20 करोड़ डॉलर से अधिक रकम की बरामदगी के लिए हसीना सरकार से मदद मांगी है। यह रकम दुनिया के कई बैंकों में जमा है।
एक अमेरिकी-ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने इस सिलसिले में बांग्लादेश के कानून मंत्री शफीक अहमद से मुलाकात की। अमेरिकी न्याय विभाग में उप प्रमुख लिंडा एम़ सैमुअल, एफबीआई एजेंट देबोराह हेप्रेवोटे और यूके इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के परामर्शदाता फिरदौस अहमद इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। इन अधिकारियों ने खालिदा के कार्यकाल के दौरान कोको और कुछ मंत्रियों को दी गई रिश्वत का ब्योरा कानून मंत्री को सौंपा। ब्योरे में उन लोगों की एक सूची संलग्न हैं जिन्होंने रिश्वत खाई।
शफीक ने रविवार की रात 'डेली स्टार' अखबार से बातचीत में कहा, "हमने इस प्रतिनिधिमंडल को इस मोटी रकम की बरामदगी में भरपूर मदद देने का वादा किया है।" इस प्रकरण ने जिया परिवार के दामन को दागदार बना दिया और इसका खामियाजा उसे चुनावी शिकस्त के रूप में भुगतना पड़ा।
खालिदा के छोटे पुत्र कोको को भ्रष्टाचार में संलिप्त होने के आरोप में जेल की हवा खानी पड़ी थी। फिलहाल वह सिंगापुर में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। शफीक के मुताबिक सिंगापुर, ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात समेत 20 देशों के बैंकों में यह रकम जमा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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