'दहेज क़रार साबित करने की ज़रुरत नहीं'

भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 304-सी का वर्णन करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर दहेज जैसे मामले में अदालत किसी क़रार की माँग करती है तो ऐसी स्थिति में तो किसी भी अपराधी को सज़ा नहीं मिल सकेगी.
न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत और न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने यह आदेश प्रेम कंवर के मामले में बचाव पक्ष के वकील की दलीलें खारिज करते हुए दिया.
दहेज के लिए हत्या
ग़ौरतलब है कि निचली अदालत ने अभियुक्त प्रेम कंवर को दहेज संबंधी क़रार नहीं होने की बुनियाद पर बरी कर दिया था, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट ने फ़ैसला पलटते हुए अभियुक्त को दहेज की माँग को लेकर अपनी बहू की हत्या का दोषी पाया था.
अभियुक्त का दावा था कि इस बात का कोई सूबूत नहीं है कि दहेज को लेकर कोई करार हुआ था और कहा था क उनकी बहू ने आग लगाकर आत्महत्या की है.
हाईकोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ कंवर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया.












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