नेपाल अंधेरे में और प्रधानमंत्री विदेश यात्राओं में मशगूल
काठमांडू, 11 जनवरी (आईएएनएस)। एक तरफ 18 घंटे की बिजली कटौती के कारण नेपाल अंधेरे में डूबा हुआ है और दूसरी ओर माओवादी प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड मौज-मस्ती व विदेश यात्राओं में मशगूल हैं।
नेपाल में बिजली-पानी की आपूर्ति की हालत यह है कि राम कुमारी फुयाल जब आज के पांच साल पहले गांव छोड़ कर राजधानी काठमांडू आई थीं, तो पश्चिमी गोरखा जिले के अपने गांव में पानी के लिए तड़के तीन बजे उठने का रोना रोती थीं। पानी मात्र एक घंटे के लिए ही आता था।
लेकिन नई माओवादी सरकार के कार्यकाल में अब राजधानी काठमांडू में वह अपेक्षाकृत अधिक कठिनाइयों का सामना कर रही हैं।
45 वर्षीय फुयाल बताती हैं, "मैं एक व्यापारिक व आवासीय इमारत की देखभाल की जिम्मेदारी संभालती हूं। आज मुझे पानी के लिए तड़के दो बजे उठना पड़ता है। पंप के जरिए पूरी इमारत के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है।"
रविवार को नेपाल में एक अभूतपूर्व निर्णय लिया गया। नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) ने विद्युत संकट से निपटने के लिए प्रतिदिन 16घंटे की विद्युत कटौती का आसान-सा रास्ता ढूंढ़ निकाला।
इस विद्युत संकट के लिए इस वर्ष मानसून में कम बारिश को जिम्मेदार ठहराया गया है। कम बारिश के कारण बिजली पैदा करने वाली नदियां तेजी से सूख रही हैं।
बिजली संकट के लिए नेपाल में सदियों से जारी भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन व राजनीतिक संकट को भी जिम्मेदार माना जाता है। सरकारें नई विद्युत परियोजनाएं स्थापित ही नहीं कर पाईं।
लेकिन देश में लोकतंत्र की स्थापना के बाद सत्ता में आई माओवादी सरकार के कार्यकाल में भी स्थितियों में सुधार का कोई रास्ता नहीं दिखाई देता।
वस्तुस्थिति यह है कि अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ कि विद्युत कटौती की समय सीमा तीसरी बार बढ़ा दी गई। शनिवार तक हर रोज 12 घंटे विद्युत कटौती जारी थी। लेकिन रविवार को 16 घंटे कटौती की घोषणा कर दी गई।
रविवार को राजधानी काठमांडू में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।
20 वर्ष तक भूमिगत रहने के बाद महंगे शूट, महंगी घड़ियां व शानदार भोजन के लिए सूर्खियों में छाए प्रधानमंत्री प्रचंड अपनी अक्षमताओं के कारण प्रदर्शनकारियों के निशाने पर रहे।
हालांकि प्रधानमंत्री सचिवालय ने पिछले महीने कहा था कि माओवादी सरकार उद्घाटनों में हिस्सा लेने के बदले काम करने में विश्वास रखेगी, लेकिन प्रचंड ने इस संकट के दौरान भी कई सारे मेलों के साथ ही पिछले हफ्ते ललितपुर में एक खेल समारोह का उद्घाटन किया।
कांतिपुर डेली में रविवार को प्रकाशित खबर के अनुसार सत्ता में आने के पांच महीने के भीतर ही माओवादी सरकार पूरे सालभर की विदेशी यात्राओं के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल कर चुकी है।
जहां, विद्युत संकट के कारण सैकड़ों कल-कारखाने बंद हो चुके हैं, वहीं प्रधानमंत्री प्रचंड पवन ऊर्जा के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए तीन स्कैंडिनेवियाई देशों की यात्रा की योजना बना रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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