अब्दुल्ला परिवार के छोटे नवाब बने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री (राउंडअप)
स्थानीय जोरावर सिंह सभागार में राज्यपाल एन. एन. वोहरा ने 38 वर्षीय उमर समेत उनकी मंत्रिपरिषद के 10 सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। उमर मंत्रिपरिषद में पांच सदस्य नेकां और पांच सदस्य कांग्रेस के हैं।
सफेद पजामे के ऊपर काले रंग की शेरवानी पहने उमर जैसे ही फूलों से सजे शपथ ग्रहण मंच पर पहुंचे तो हजारों की तादाद में वहां मौजूद लोगों ने उनके समर्थन में तालियां बजाकर और नारेबाजी कर उनका स्वागत किया। उन्होंने अंग्रेजी में शपथ ली। उमर को शपथ लेते देखने के लिए उनकी पत्नी, दोनों बच्चे जहीर व जमीर और पिता फारुक अब्दुल्ला भी पहुंचे।
शपथ लेने के बाद उमर ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "मैं सिर्फ मुख्यमंत्री बने नहीं रहना चाहता मैं चाहता हूं कि मुझे जनता के मुख्यमंत्री के रूप में लोग याद रखें।"
उन्होंने कहा, "सूबे के लोग मेरे साथ हैं। मेरी सोच के बारे में वे जानते हैं। जनता की ही बदौलत मैं आज इस मुकाम पर पहुंचा हूं।"
इस अवसर पर उमर के पिता फारुक से जब यह पूछा गया कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, "पापा कहते हैं अच्छा काम करेगा, लोगों की मुश्किलें दूर करेगा।"
उमर के तत्काल बाद कांग्रेस के ताराचंद ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्य में नेकां-कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनी है।
कांग्रेस के ताराचंद और शामलाल को छोड़ दिया जाए तो जिन विधायकों को मंत्री बनाया गया है वे सभी पूर्व सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। नेकां के अब्दुर रहीम राठेर, अली मोहम्मद सागर, मियां अल्ताफ और सुरजीत सिंह सलाथिया को मंत्री बनाया गया है जबकि कांग्रेस के पीरजादा मोहम्मद सईद और रिगझिन जोरा को मंत्री बनाया गया है।
बहरहाल, सूबे के आला नेताओं का मानना है कि उमर की आगे की राह आसान नहीं होगी। राज्यसभा सदस्य कर्ण सिंह ने कहा, "कई ऐसे मुद्दे हैं जिनसे उमर व उनकी सरकार को जूझना पड़ सकता है लेकिन मेरा मानना है कि नेकां और कांग्रेस साथ रही तो वे सभी मोर्चो पर सफल हो सकते हैं।"
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती समेत कई जानी-मानी हस्तियां भी शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने पहुंची।
उमर जम्मू-कश्मीर के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं। साथ ही राज्य की कमान संभालने वाले वे शेख अब्दुल्ला और फारुक अब्दुल्ला के बाद अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा के लिए हालिया दिनों में संपन्न चुनाव में नेकां सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। उसने 28 सीटों पर विजय प्राप्त की जबकि 87 सदस्यीय राज्य विधानसभा में कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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