झुग्गीवासियों की एकमात्र पत्रिका का अस्तित्व खतरे में

मैत्रेयी बरुआ

बेंगलुरु, 5 जनवरी(आईएएनएस)। शहर में विकास के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े झुग्गीवासियों की एकमात्र पत्रिका 'द स्लम जगाथु' अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। पत्रिका प्रबंधन ने इसे बचाने के लिए सरकारी या निजी मदद लेने से इंकार कर दिया है।

इस शहर से निकलने वाली यह पत्रिका मासिक है। आर्थिक संकट के कारण दिसंबर 2008 और जनवरी 2009 में इस पत्रिका के अंक नहीं निकले पाए। बेंगलुरु में झुग्गी वासियों की संख्या करीब 900,000 है और यह पत्रिका इसी तबके की समस्याओं पर रोशनी डालती है।

इसके अलावा यह इन लोगों को सजग भी करती है। उन्हें झुग्गीवासियों के लिए सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं के बारे में यह सूचित करती है।

इसका मूल्य 5 रुपए है और इसकी प्रसार संख्या 2500 है। इसकी प्रसार संख्या भले ही कम है लेकिन इसका पाठक वर्ग बड़ा है। इसे 50,000 से 60,000 लोग पढ़ते हैं। पत्रिका के संपादक इसैक अरूल सेल्वा कहते हैं, "हम किसी संगठन या सरकार से मदद नहीं लेते। पत्रिका आर्थिक संकट से गुजर रही है। इसकी एक प्रमुख वजह यह है कि प्रति अंक लागत 5़65 रुपए है, जबकि इसकी कीमत 5 रुपये रखी गई है।"

उन्हें उम्मीद है कि वह इसका फरवरी अंक निकाल पाएंगे। वह इन दिनों अगले अंक के प्रकाशन की तैयारी में लगे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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