कंधमाल हिंसा के कारण नक्सलवादियों में हुआ धार्मिक विभाजन
भुवनेश्वर, 30 दिसम्बर (आईएएनएस)। कंधमाल में विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद भड़की हिंसा ने नक्सली संगठन 'माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी' के भीतर पहली बार धार्मिक विभाजन को जन्म दिया है।
इसका खुलासा तब हुआ जब गुट ने माओवादी पार्टी के ईसाई सदस्यों को धमकी देने वाले पोस्टर प्रकाशित किए। नए संगठन का नाम 'माओवादी आदर्श लोकतांत्रिक गुरिल्ला सेना' (आईडीजीए-एम) है।
सूत्रों के अनुसार नए संगठन का औपचारिक उद्घाटन किसी अज्ञात स्थान पर तीन जनवरी को एम2 नाम के गुरिल्ला नेता के नेतृत्व में होने वाला है।
उल्लेखनीय है कि स्वामी की हत्या के बाद कंधमाल में भड़की हिंसा में 40 के करीब गरीब ईसाइयों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने जहां हत्या का दोष माओवादियों पर मढ़ा, वहीं विश्व हिंदू परिषद ने इसके लिए ईसाइयों को जिम्मेदार ठहराया। नक्सलवादियों ने स्वामी की हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था कि वे इस गरीब क्षेत्र में सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहे थे।
नक्सलवादियों से अलग हुए धड़े आईडीजीए-एम ने स्वामी की हत्या के लिए माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी की सैनिक शाखा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) और उसके नेता सब्यसाची पांडा की निंदा की है।
नक्सलवादियों के अलग हुए धड़े के एक नजदीकी व्यक्ति का कहना है कि विभाजन का कारण कंधमाल हिंसा है। इसके लिए पांडा दोषी है। उसने कहा कि नक्सलवादियों का कोई धर्म नहीं होता है। उनका धर्म गरीबों की रक्षा और दमन तथा उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष है।
नक्सलवादी आंदोलन से परिचित लोगों का मानना है कि इस विभाजन के बाद हिंसा बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि राज्य के 30 में से 16 जिले नक्सलवादी समस्या से प्रभावित हैं। मल्कानगिरी, कोरापुट, रायगढ़, कंधमाल, नयागढ़ और गजपति जिलों में नक्सलवाद का सबसे अधिक प्रभाव है।
नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के नक्सलवादी मामलों के विशेषज्ञ निहार नायक ने आईएएनएस से कहा कि यदि धार्मिक आधार पर नक्सलवादी संगठन में विभाजन हुआ तो यह भारत में वामपंथी आंदोलन के इतिहास की पहली घटना होगी। जब से भारत में नक्सलवादी आंदोलन आरंभ हुआ, उसने कभी भी किसी धर्म, जाति या समुदाय का समर्थन नहीं किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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