विस चुनाव : साध्वी प्रज्ञा के रिश्तों पर सियासत की जंग
ग्वालियर, 22 नवंबर (आईएएनएस)। मालेगांव विस्फोटों की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मसला जहां इन दिनों हर नेता को बढ़-चढ़ कर बोलने की खुराक दे रहा है वहीं उसकी निजी जिन्दगी के कुछ अनछुए पहलू भी राजनीति की बिसात पर दांव पर लग गए हैं।
भिंड के अटेर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक ऐसे शख्श को उम्मीदवार बनाया है जिसने यदि प्रज्ञा का साथ दिया होता तो शायद वह कभी साध्वी नहीं बनती। दरअसल, भाजपा उम्मीदवार अरविंद सिंह भदौरिया से प्रज्ञा की शादी होने वाली थी। प्रज्ञा के जीजा उसका रिश्ता लेकर भदौरिया के घर भी गए थे, लेकिन तब तक भदौरिया और प्रज्ञा के बीच की दूरियां इतनी बढ़ गई थीं कि प्रज्ञा ने ही शादी करने से मना कर दिया। अब कांग्रेस के उम्मीदवार सत्यदेव कटारे इसी मुद्दे को चुनाव में भुना रहे हैं।
सत्यदेव कहते हैं कि अरविंद और प्रज्ञा के रिश्ते तो जगजाहिर हैं। भाजपा ने ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया है जिसके रिश्ते साध्वी प्रज्ञा से रहे हैं। भाजपा को स्पष्ट करना होगा कि उसने ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार क्यों बनाया।
दरअसल अटेर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है और कटारे साध्वी के रिश्ते को हवा देकर एक वोट बैंक पर अपना कब्जा जमाना चाहते हैं।
वहीं दूसरी ओर अरविंद प्रज्ञा के साथ अपने रिश्ते को नकार रहे हैं। वे इतना स्वीकारते हैं कि प्रज्ञा ने उनके साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में काम किया है और वे उनकी साथी रही है।
लहार और भिंड के लोग बताते हैं कि भिंड में पढ़ाई के दौरान प्रज्ञा का अरविंद से परिचय हुआ और दोनों ने एबीवीपी में साथ-साथ कदम बढ़ाया। इस दौरान दोनों की नजदीकियां बढ़ीं। प्रज्ञा राजनीति में शिखर तक जाना चाहती थी इसलिए अरविंद के साथ उसने भिंड से भोपाल की तरफ कदम बढ़ाया। अरविंद तो राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने लगे परंतु प्रज्ञा की झोली में कुछ नहीं आया। इसके बाद दोनों में दूरियां बढ़ने लगीं। हालात ने प्रज्ञा को साध्वी प्रज्ञा बनने पर मजबूर कर दिया।
प्रज्ञा को जानने वाले प्रहलाद सिंह भदौरिया बताते हैं कि प्रज्ञा तेज-तर्रार और खुले विचारों की थी। प्रज्ञा राजनीति में मुकाम हासिल करना चाहती थी और वह महत्वकांक्षी भी थी। राजनीति में कदम बढ़ाने पर उसे लगा कि यह रास्ता आसान नहीं हैं। लिहाजा वह राजनीति को छोड़ साधू-संतो की जमात में शामिल हो गई।
चंबल संभाग के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में तो प्रज्ञा कोई मुद्दा नहीं है परंतु अटेर विधानसभा क्षेत्र में तो प्रज्ञा ही चुनाव मुद्दा बनकर उभरी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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