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भारत ने नहीं खरीदा, तो रूसी नौसेना में शामिल हो सकता है गोर्शकोव

By Staff
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मास्को, 22 नवंबर (आईएएनएस)। रूस के विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव की कीमत के बारे में भारत से सहमति नहीं बनने की सूरत में उसे रूसी नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।

गोर्शकोव की मरम्मत का काम वर्ष 2004 में आरंभ हुआ था और इसे 2008 में भारतीय नौसेना को सौंपा जाना था। परंतु रूस के सेवमाश शिपयार्ड में ऐसे जहाजों के निर्माण के अनुभव की कमी के कारण इसकी मरम्मत लागत और उसमें लगने वाला समय बढ़ गया।

वर्ष 2007 में कहा गया कि गोर्शकोव की कीमत और सौदे की अन्य शर्तो पर सहमति में होने वाली देरी के कारण अब इसे वर्ष 2010 के पहले भारत को सौंपना संभव नहीं होगा।

13 नवंबर को सेवमाश के उप प्रमुख सेर्गई नोवोसेलोव ने कहा है कि जहाज की मरम्मत का काम पूरा करने में कम से कम दो अरब डॉलर की आवश्यकता है।

बहरहाल भारत ने परियोजना के लिए तय रकम से केवल कुछ लाख डॉलर ही अधिक देने पर सहमति दी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कीमतों पर विवाद कब खत्म होगा। संभावना है कि इस वर्ष के अंत तक इस पर निर्णय हो सकता है।

यदि भारत के साथ कीमतों पर सहमति नहीं बनी तो इससे रूस की साख को धक्का पहुंचेगा। एक दूसरा विकल्प यह कि रूस खुद इस मरम्मत परियोजना का खर्च वहन करे और उसके बाद पोत को अपनी नौसेना में शामिल कर ले।

रूसी नौसेना को विमानवाहक पोत की आवश्यकता है और यदि पोत का निर्माण 2008 में आरंभ हुआ इसके 2015 से पहले पूरा होने की आशा नहीं है।

बहरहाल गोर्शकोव के भविष्य पर फैसला शीघ्र होने की आशा है। यह कहना कठिन है कि दोनों संभावित परिणामों में से रूस के लिए कौन बेहतर है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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