जोधपुर की रक्षक मानी जाती हैं देवी चामुंडा

जोधपुर, 30 सितम्बर (आईएएनएस)। राजस्थान के जोधपुर शहर में स्थित प्रसिद्ध चामुंडा माता मंदिर में विराजमान देवी को स्थानीय लोग अपना संरक्षक मानते हैं और वे उन्हें अपनी मनोकामनाएं पूरी करने वाली भी मानते हैं।

मेहरानगढ़ किले के दक्षिणी छोर पर स्थित इसी मंदिर में मंगलवार सुबह मची भगदड़ के दौरान कम से कम 144 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक घायल हो गए।

चामुंडा को देवी दुर्गा का ही एक रूप माना जाता है। जोधपुर के संस्थापक राव जोधा उनके बहुत बड़े उपासक थे और वे देवी की मूर्ति को मांडोर स्थित पुराने मंदिर से लेकर आए थे। उन्होंने सन 1460 में मूर्ति को किले में स्थापित किया। मां चामुंडा इस पूर्व राजघराने की कुल देवी भी हैं।

देश के सबसे बड़े किलों में से एक मेहरानगढ़ किला शहर से 400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। चामुंडा मंदिर में हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। नवरात्र के दिनों में इनकी संख्या और अधिक बढ़ जाती है।

मंदिर मार्ग की चौड़ाई पांच-छह फीट से अधिक नहीं है शायद यही वजह थी कि मंगलवार को इतना बड़ा हादसा हुआ।

श्रद्धालु इस विश्वास से मंदिर में आते हैं कि देवी उनकी रक्षा करेंगी। वे अपनी मनोकामना पूर्ति की चाहत में कपड़े का टुकड़ा अथवा धागा मंदिर में बांध जाते हैं और उसके पूरा होने पर फिर देवी के दर्शन करते हैं।

मंदिर की देखरेख महाराजा उम्मैद सिंह रिलीजियस ट्रस्ट द्वारा की जाती है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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