बनारस में वीआईपी के नाम रहा सावन का अंतिम सोमवार
वाराणसी, 11 अगस्त (आईएएनएस)। कहते हैं कि बाबा के दरबार में कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता है। लेकिन आज सावन के अंतिम सोमवार को बाबा भोलेनाथ पूरे दिन वीआईपी, मंत्रियों और अफसरों से ही घिरे रहे। आम श्रद्धालु पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की इज्जत करके घंटों लाइन में खड़े धक्के खाते रहे, तो सुरक्षा में लगे पुलिस के जवान मन मसोस कर वीआईपी दर्शन कराते रहे।
भोर में मंगला आरती से लेकर पूरे दिन हूटर बजती लाल नीली बत्तियां लगी गाड़ियों से पहुंचने वाले मंत्रियों और अफसरों ने सीधे बाबा के दरबार में जाकर दर्शन पूजन किया। इस तरह उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का माखौल भी उड़ाया।
ठीक साढ़े दस बजे झारखंड के मुख्यमंत्री मधु कोड़ा अपनी पूरी लाव लस्कर के साथ मंदिर में हाजिर हुए और सभी श्रद्धालुओं को रोक कर उन्हें दर्शन कराया गया। जैसे ही मधु कोड़ा मंदिर से बाहर आये वैसे ही गोवा के मुख्यमंत्री दिग्ांबर कामत, महाराष्ट्र के पूर्व गृहराज्य मंत्री कृपाशंकर सिंह, बसपा के नेता डा़ अवधेश सिंह के कारों का लंबा काफिला छत्ता द्वार पर आकर रुका।
सुरक्षाकर्मियों ने पहले उन्हें दर्शन पूजन की व्यवस्था की और इस बीच पचासों हजार श्रद्धालु बाहर इंतजार में खड़े थे। यहां पहुंचे वीआइपी ने मंदिर के अंदर विधिवत षोडशोपचार पूजन किया और फिर 101 किलो दूध से बाबा का दुग्धाभिषेक किया।
मंदिर में पूजन कराने वाले पं. श्रीकांत मिश्र ने बताया कि पूजन लगभग एक घंटे तक चला इस दौरान सभी श्रद्धालुओं को बाहर ही रोक दिया गया था। मिश्र ने बताया कि पूजन के दौरान भी कुछ लोगों को दर्शन की इजाजत दी गयी थी लेकिन वे भी कोई वीआईपी ही थे।
मंदिर में घंटों चले वीआईपी दर्शन के कारण गोदौलिया तक श्रद्धालुओं की लगी लाइन के बारे में जब सुरक्षा व्यवस्था में लगे एस. पी. अमरेन्द्र सिंह पूछा गया तो उन्होंने लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि क्या करें नौकरी करना है तो यह सब करना पड़ता है।
लगभग एक घंटे के इंतजार के बाद जब धीरे धीरे श्रद्घालुओं को मंदिर में जाने दिया गया तो एकाएक हुई भीड़ से अफरा तफरी मच गयी, जिसके कारण कुछ लोंगो को गर्भ गृह के आधे हिस्से से ही वापस कर दिया गया। श्रद्घालुओं में गुस्सा तब और बढ़ गया जब साढ़े ग्यारह बजे मंदिर भोग आरती के लिए फिर एक घंटे के लिए बंद कर दिया गया।
सोनभद्र से बाबा को जल चढ़ाने आये विश्वनाथ भदौरिया ने गुस्से में बताया कि अब तो भगवान के दरबार में भी लोग वीआईपी होने में गर्व कर रहे हैं। भदोही से श्रीनाथ गोस्वामी जो अव्यवस्था के चलते दर्शन से ही महरूम रह गये ने बताया कि शायद दर्शन बाबा को ही मंजूर नहीं था किसी को दोष देने से क्या फायदा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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