जटिल फैसले चेतन अवस्था में ही लिए जा सकते हैं: रिपोर्ट

वाशिंगटन, 11 अगस्त(आईएएनएस)। एक नए शोध निष्कर्ष ने वर्ष 2006 में डच शोधकर्ताओं द्वारा निकाले गए इस शोध निष्कर्ष को गलत साबित कर दिया है कि बेहद जटिल फैसले का सूत्र अचेतन अवस्था या सुषुप्तावस्था में ही दिमाग में कौंधता है।

वाशिंगटन, 11 अगस्त(आईएएनएस)। एक नए शोध निष्कर्ष ने वर्ष 2006 में डच शोधकर्ताओं द्वारा निकाले गए इस शोध निष्कर्ष को गलत साबित कर दिया है कि बेहद जटिल फैसले का सूत्र अचेतन अवस्था या सुषुप्तावस्था में ही दिमाग में कौंधता है।

डच शोधकर्ताओं का दावा था कि घर या कार खरीदने जैसे मसले पर घोर दिमागी उलझन की स्थिति में अचेतन अवस्था या सुषुप्तावस्था किसी निष्कर्ष पर अचानक पहुंचने में मदद देती है। नए शोध के तहत शोधकर्ताओं ने इस मसले पर बहुस्तरीय शोध किया। इस विषय पर उन्होंने चार शोध किए। उन्होंने इन प्रतिभागियों से निर्णय की सर्वश्रेष्ठ अवस्थाओं के बारे में पूछा।

इस शोध से पता चला कि लोग चेतन अवस्था में ही बेहतर फैसला ले सकते हैं। उन्हें घोर उलझन की स्थिति में अचेतन या सुषुप्तावस्था में दिमाग के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला। उनके मुताबिक लोग घर या कार खरीदने का निर्णय उसके रंग, मूल्य, सुरक्षा कारकों आदि से प्रभावित होकर लेते हैं। ऐसे फैसले दिमागी सक्रि्रयता या अतिरिक्त दिमागी बल की बदौलत ही लिए जा सकते हैं। न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के मनोचिकित्सक बेन नेवेल और उनके सहयोगियों ने यह शोध किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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