नेपाल में उपराष्ट्रपति के हिंदी में शपथ लेने का मुद्दा सड़क तक पहुंचा

काठमांडू, 25 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल के पहले उपराष्ट्रपति परमानंद झा द्वारा बुधवार को हिंदी में शपथ लेने के बाद से ही देश भर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन रूकने के नाम नहीं ले रहे हैं। यह मुद्दा अब सड़कों तक पहुंच गया है।

काठमांडू, 25 जुलाई (आईएएनएस)। नेपाल के पहले उपराष्ट्रपति परमानंद झा द्वारा बुधवार को हिंदी में शपथ लेने के बाद से ही देश भर में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन रूकने के नाम नहीं ले रहे हैं। यह मुद्दा अब सड़कों तक पहुंच गया है।

पूर्व न्यायाधीश झा के पद और गोपनीयता की शपथ हिंदी में लेने के कारण शुक्रवार को राजधानी काठमांडू और तराई के इलाकों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कुल आठ छात्र संगठन झा का विरोध कर रहे हैं। कई छोटी राजनीतिक पार्टियां भी विरोध प्रदर्शनों में कूद चुकी है।

गुरुवार से ही नावालपारसी, चितवन, सारलाही और राजधानी काठमांडू के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। गौरतलब है कि झा को बुधवार को जब राष्ट्रपति रामबरन यादव नेपाली में शपथ दिला रहे थे, तो उन्होंने नेपाली के बदले हिंदी में शपथ ली।

नेपाल शिक्षक संघ के पूर्व प्रमुख केशव प्रसाद भट्टराई ने शपथ ग्रहण समारोह में झा के पहनावे पर भी आपत्ति दर्ज की। दरअसल, शपथ ग्रहण समारोह में झा भारतीय पोशाक धोती-कुर्ता पहने थे। गौरतलब है कि नेपाल में धोती को अपमानजनक वस्त्र माना जाता है।

भट्टराई ने कहा कि सरकार को यह कानून बनाना चाहिए कि सरकरी कार्यक्रमों में उच्च पदों पर आसीन लोग राष्ट्रीय वेश में पहुंचे। मीडिया में भी झा के हिंदी में शपथ लेने के मामले को उछाला जा रहा है। माओवादी समाचार पत्र 'जनदिशा' के संपादकीय में झा की निंदा की है। समाचार पत्र झा के हिंदी में शपथ लेने को भारत से जोड़कर देख रहा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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