पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के नतीजे से निवेश क्षेत्र को झटका
कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। कम्युनिस्ट शासित पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के नतीजों से न सिर्फ सत्तारूढ़ वाम गठबंधन को करारा झटका लगा है, बल्कि कई औद्योगिक परियोजनाओं का भविष्य भी अनिश्चितता के घेरे में आ गया है।
कोलकाता, 18 जून (आईएएनएस)। कम्युनिस्ट शासित पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के नतीजों से न सिर्फ सत्तारूढ़ वाम गठबंधन को करारा झटका लगा है, बल्कि कई औद्योगिक परियोजनाओं का भविष्य भी अनिश्चितता के घेरे में आ गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेतृत्व वाले गठबंधन को पंचायत चुनाव में अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पाई। राज्य के ग्रामीण इलाकों, जहां निवेश परियोजनाओं को अमल में लाने में सरकार को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, में इस गठबंधन को जोरदार झटका लगा है। खासकर, उन इलाकों के मतदाताओं ने गठबंधन के खिलाफ अपना मत दिया जहां औद्योगिक इकाइयों के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है।
ग्रामीण मतदाताओं के आक्रोश को विपक्षी तृणमूल कांग्रेस पार्टी भुनाने में सफल रही और उसने पूर्वी मिदनापुर और साउथ 24 परगना की जिला परिषदों पर कब्जा जमा लिया। इसके अलावा कई और इलाकों में इसे सफलता मिली। इस परिणाम से उत्साहित इस पार्टी ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर दबाव और बढ़ाने का फैसला किया है। तृणमूल नेता पार्थ चट्टोपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हम इस सरकार को खेती योग्य जमीन का इस्तेमाल औद्योगीकरण के लिए नहीं करने देंगे।"
इस नतीजे ने कई परियोजनाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मसलन, डीएलएफ की 330 अरब रुपए की डानकुनी मेगा सिटी परियोजना के लिए सरकार अभी तक प्रस्तावित 4840 एकड़ जमीन में से 200 एकड़ जमीन का ही अधिग्रहण कर सकी है। इस चुनावी नतीजे ने यह काम और कठिन बना दिया है। जेएसडब्ल्यू बंगाल स्टील, भूषण स्टील, वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन आदि की परियोजनाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण अब आसान नहीं रह जाएगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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