करार पर बुश प्रशासन से मिली मोहलत पर वाम नहीं हुआ राजी (लीड-2)

वाशिंगटन/नईदिल्ली, 18 जून (आईएएनएस)। भारत-अमेरिका परमाणु करार के मसले पर आगे बढ़ने की मंशा रखने वाली कांग्रेसनीत केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) को भले ही वामपंथी दलों की तरफ से मायूसी हाथ लग रही हो लेकिन वाशिंगटन से आज उसके लिए एक अच्छी खबर आई।

अमेरिका ने कहा है कि वह अगले साल की 20 जनवरी यानी बुश प्रशासन के अंतिम समय तक करार को अमली जामा पहनाने के लिए भारत का इंतजार करेगा ताकि करार को अमेरिकी संसद से पारित कराया जा सके।

अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता टॉम कैसे ने परमाणु समझौते के रास्ते से गतिरोध समाप्त करने के लिए अंतिम क्षण तक प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्घता दोहराई है। उन्होंने कहा, "अगले 20 जनवरी तक बुश प्रशासन इस करार की राह से मुश्किलें दूर करने का भरपूर प्रयास जारी रखेगा। मौजूदा प्रशासन अपने कार्यकाल के अंतिम दिन तक यह प्रयास जारी रखेगा।"

उन्होंने कहा कि इस करार के लिए वक्त तेजी से बीतता जा रहा है। सरकार इस मसले पर अमेरिकी कांग्रेस की सहमति हासिल करने की भरपूर कोशिश कर रही है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति बुश का कार्यकाल 20 जनवरी, 2009 को समाप्त हो रहा है।

टॉम ने कहा कि बुश प्रशासन के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण मसला है और हम भारत सरकार को इस पर सहमति की मुहर लगाने के लिए प्रोत्साहित करते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगली अमेरिकी सरकार का रवैया इस मामले में अनुकूल रहेगा।

उन्होंने कहा, "इस मामले में एक बड़ी अड़चन यह है कि भारत में इसे लेकर आंतरिक राजनीतिक टकराव जारी है। इस मुद्दे पर भारत में राजनीतिक सहमति कायम किए जाने की जरूरत है। यह समझौता दोनों देशों के हित में है। हमारे लिए वक्त काफी कीमती है और जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा है, हमारी चिंता बढ़ रही है।"

इधर, समझौते पर आगे बढ़ने के लिए संप्रग सरकार की मंशा पर वामदलों ने आज एक बार फिर पानी फेर दिया। वामपंथी दलों ने एक बैठक के बाद एक बार फिर स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी सूरत में सरकार को आईएईए के साथ सुरक्ष समझौते को हरी झंडी नहीं देंगे।

संप्रग और वामदलों के बीच आज होने वाली प्रस्तावित बैठक 25 जून तक के लिए टल जाने के कुछ घंटों के बाद ही वामपंथी दलों की एक बैठक हुई। बैठक के बाद वामदलों ने फिर से समझौते के विरोध में अपना राग अलापा।

बैठक स्थगित होने का आधिकारिक कारण विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी की भारत के दौरे पर आए सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद से प्रस्तावित मुलाकात बताया जा रहा है।

इस बीच कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि करार को लेकर पार्टी नेतृत्व अभी भी भ्रम की स्थिति में है। पार्टी के एक नेता ने बताया कि केंद्रीय नेतृत्व से जुड़ा एक वर्ग करार को भूल जाने के पक्ष में है जबकि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत दूसरे वर्ग का मानना है कि करार जरूरी है क्योंकि इससे भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी।

ज्ञात हो कि 15 सदस्यीय संप्रग-वाम समिति के संयोजक प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात से भेंट कर करार के फायदों के बारे में फिर से अवगत कराया था।

नाम न छापने की शर्त पर एक वामपंथी नेता ने आईएएनएस को बताया, "करार पर सरकार के आगे बढ़ने के बारे में हमने यदि इजाजत दे दी तो हम जनता से क्या कहेंगे। यह हमारी बड़ी राजनीतिक भूल होगी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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