सिखों के कड़ा धारण करने पर ब्रिटिश अदालत में बहस
लंदन, 18 जून (आईएएनएस)। 'कड़ा' गहनों की श्रेणी में नहीं आता। यह सिखों द्वारा हाथ में धारण किया जाने वाला एक धार्मिक प्रतीक है। क्रिकेटर मोंटी पनेसर भी कड़ा पहनते हैं। ये दलीलें ब्रिटेन की एक अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को पेश की गई।
लंदन, 18 जून (आईएएनएस)। 'कड़ा' गहनों की श्रेणी में नहीं आता। यह सिखों द्वारा हाथ में धारण किया जाने वाला एक धार्मिक प्रतीक है। क्रिकेटर मोंटी पनेसर भी कड़ा पहनते हैं। ये दलीलें ब्रिटेन की एक अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को पेश की गई।
दरअसल, वेल्स प्रांत में रहने वाली भारतीय मूल की 14 वर्षीय सारिका वाटकिंस सिंह को पिछले नवम्बर माह में उसके स्कूल से सिर्फ इसलिए निकाल कर दूसरे स्कूल भेज दिया गया था क्योंकि उसने कड़ा पहन रखा था। इस स्कूल में किसी प्रकार के गहने पहनना प्रतिबंधित है। स्कूल प्रशासन ने कड़े को भी गहने की श्रेणी में माना था।
इस संबंध में ब्रिटेन के मानवाधिकार संगठन 'लिबर्टी' द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सारिका की वकील हेलेन माउंटफील्ड ने अपनी उक्त दलील के दौरान मोंटी पनेसर की एक तस्वीर भी दिखाई। इस तस्वीर में पनेसर कड़ा पहने हुए थे।
हेलेन ने यह तस्वीर दिखाकर लंदन के उच्च न्यायालय के जज स्टीफन सिलबर को यह समझाने का प्रयास किया कि आखिर सिखों के लिए कड़े का कितना धार्मिक महत्व है।
इसके जवाब में जज सिलबर ने कहा कि तीन दिनों तक चलने वाली इस सुनवाई के दौरान वे वास्तविक कड़ा देखना चाहेंगे।
उल्लेखनीय है कि बुर्का पहनकर स्कूल आने से रोके जाने के मामले में भी एक मुस्लिम लड़की ने इसे मानवाधिकार का उल्लंघन मानते हुए इस संबंध में याचिका दायर की थी जिसे सिलबर ने खारिज कर दिया था। जज सिलबर ने पिछले साल स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के बुर्का पहनने पर रोक लगाने संबंधी अधिकार स्कूलों को दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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