उल्फा से वार्ता पर असम सरकार ने अपनाया कड़ा रुख
गुवाहाटी, 18 जून (आईएएनएस)। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा) और असम सरकार के बीच शांति वार्ता व संघर्ष विराम की उम्मीदों को आज तगड़ा झटका लगा है।
वार्ता से पहले मुख्यमंत्री तरूण गोगोई ने उल्फा के समक्ष पांच शर्ते रखीं। इन शर्तो में हथियारों के समर्पण की शर्त भी शामिल थी।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, "संघर्ष विराम या शांति वार्ता तभी होगी जब अलगाववादी संगठन के आतंकवादी अपने हथियारों का समर्पण करंे और निर्दिष्ट कैंपों में ही रहें। साथ ही बातचीत बगैर किसी मध्यस्थ के सीधे दोनों पक्षों के बीच होगी।"
उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम के दौरान आतंकवादियों को धन इकट्ठा नहीं करने दिया जाएगा और बातचीत भारतीय संविधान के दायरे में ही होगी।
मुख्यमंत्री ने उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें कहा जा रहा था कि सरकार ने उल्फा की 28वीं बटालियन के साथ संघर्ष विराम समझौता किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक उल्फा से किसी प्रकार का संघर्ष विराम नहीं किया गया है।
चालू वर्ष में सरकार की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में अब तक लगभग 70 आतंकवादी मारे जा चुके हैं। गोगोई ने कहा कि निश्चित तौर पर उल्फा का आधार समाप्त हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 2005 के अगस्त महीने में उल्फा के साथ संघर्ष विराम की घोषणा की थी लेकिन छह सप्ताह के भीतर ही संबंधित समझौता टूट गया था। केंद्र सरकार ने संघर्ष विराम में अवरोध के लिए उल्फा को जिम्मेदार ठहराया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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