अमेरिकी चिकित्सकों का सुझाव, रिनी बाघिन को मिले दया मृत्यु

भोपाल, 17 जून (आईएएनएस)। भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में कैंसर से पीड़ित 18 वर्षीय सफेद बाघिन (रिनी) के स्वस्थ होने की उम्मीद अमेरिकी पशु चिकित्सकों ने भी छोड़ दी है। अब वे लोग रिनी को 'दया मृत्यु' देने का सुझाव दे रहे हैं लेकिन वन विहार ने फिलहाल इस सुझाव पर अमल करने से इंकार कर दिया है।

बुजुर्ग रिनी पिछले कुछ माह से बीमार है। उसकी आंखों के नीचे एक मस्सा था जिसे ऑपरेशन के द्वारा अलग किया गया था लेकिन उस समय इस बात की जानकारी नहीं लग पाई थी कि उसे कैंसर है। ऑपरेशन के बावजूद रिनी की हालत में सुधार न होने पर अमेरिका से दो पशु चिकित्सक डा. जोशवाडीन और डा. स्कॉट सिटीनो को परामर्श के लिए यहां बुलाया गया था।

भोपाल परिक्षेत्र के वन संरक्षण अधिकारी ए़ क़े भट्टाचार्य ने मंगलवार को आईएएनएस को बताया कि दोनों अमेरिकी चिकित्सकों को रिनी की स्थिति से संबंधित ई-मेल भेजा था। जवाब में उन्होंने कहा कि रिनी असहनीय पीड़ा झेल रही हैं लिहाजा उसे 'दया मृत्यु' दे दी जाए।

भट्टाचार्य ने अहिंसा और करूणा की भारतीय परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि रिनी को बचाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। रिनी अभी खा-पी रही है। इससे ऐसा महसूस नहीं होता कि वह मौत के करीब हैं और असहनीय पीड़ा से गुजर रही है।

वन विहार के सहायक संचालक ए़ क़े खरे ने आईएएनएस को बताया कि भारत में भी अमेरिका की तहत जानवरों को 'दया मृत्यु' देने का प्रावधान है। केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसके लिए नीति निर्देश भी तय कर रखे हैं। इन नीति निर्देशों के मद्देनजर ही रिनी के मामले की समीक्षा की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि रिनी वन विहार की सबसे बुजुर्ग जानवर है और उसे चार वर्ष की उम्र में ही नंदन कानन चिड़ियाघर से यहां लाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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