प्रतिबंधित उपकरण भारत भेजने के आरोप में भारतीय को सजा

वाशिंगटन, 17 जून (आईएएनएस)। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को कथित तौर पर इलेक्ट्रानिक उपकरण निर्यात करने के आरोप में एक भारतीय अमेरिकी नागरिक को 35 माह के करावास की सजा सुनाई गई है। मिसाइलों, अंतरिक्ष यानों और लड़ाकू विमानों के निर्माण में लगे भारतीय प्रतिष्ठानों को ये इलेक्ट्रानिक उपकरण निर्यात किए गए।

वाशिंगटन, 17 जून (आईएएनएस)। भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को कथित तौर पर इलेक्ट्रानिक उपकरण निर्यात करने के आरोप में एक भारतीय अमेरिकी नागरिक को 35 माह के करावास की सजा सुनाई गई है। मिसाइलों, अंतरिक्ष यानों और लड़ाकू विमानों के निर्माण में लगे भारतीय प्रतिष्ठानों को ये इलेक्ट्रानिक उपकरण निर्यात किए गए।

'साईरस इलेक्ट्रोनिक्स' के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पार्थसारथी सुदर्शन को सोमवार को वाशिंगटन की जिला अदालत ने यह सजा सुनाई। इस कंपनी के कार्यालय दक्षिण कैरोलिना, सिंगापुर और बंगलौर में भी हैं। अमेरिकी न्याय मंत्रालय के अनुसार पार्थसारथी पर वर्ष 2002 से 2006 के बीच इलेक्ट्रानिक उपकरणों को भारत भेजने का दोषी पाया गया।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सुदर्शन ने भारत सरकार के उपक्रम विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टेबलिशमेंट (एडीई) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) को मिसाइल से जुड़े उपकरण मुहैया करवाए।

सुदर्शन ने 'तेजस' के लिए माइक्रोप्रोसेसर हासिल करने की बात स्वीकार की है। 'तेजस' भारतीय रक्षा विभाग द्वारा विकसित एक लड़ाकू विमान है।

न्याय विभाग ने एक बयान में कहा है कि वीएसएससी और बीडीएल भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान हैं और इन प्रतिष्ठानों को किसी भी तरह के उपकरण निर्यात करने से पहले अमेरिकी वाणिज्य विभाग से अनुमति लेनी होती है। बयान में कहा गया है कि माइक्रोप्रोसेसर हथियारों की श्रेणी में आता है और इसके निर्यात के लिए विदेश विभाग से लाइसेंस की जरूरत पड़ती है।

लेकिन वीएसएससी, बीडीएल और एडीई को भेजे गए उपकरणों के लिए निर्यात लाइसेंस नहीं लिया गया था।

बयान के मुताबिक 47 वर्षीय सुदर्शन ने दक्षिण कैरोलिना से सिंगापुर के रास्ते इन उपकरणों को भारत पहुंचाया। इस मामले में सुदर्शन के अलावा एक और व्यापारी शामिल है। इन दोनों ने अमेरिकी कंपनियों को जाली दस्तावेज मुहैया कराकर यह सुनिश्चित करवाया कि निर्यात किए जाने वाले उपकरण भारत के अप्रतिबंधित उपक्रमों को भेजे जा रहे हैं।

अभियोजन पक्ष ने कहा है कि सिंगापुर आने से पहले सुदर्शन ने भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों में कई वर्षो तक इलेक्ट्रानिक इंजीनियर के रूप में काम किया था। सुदर्शन ने 1997 में 'साइरस' नामक कंपनी की स्थापना की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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