पंजाब और बंगाल के पंचायत चुनावों में लोकतंत्र का मखौल उड़ा : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। पंजाब और पश्चिम बंगाल में मई 2008 में हुए पंचायत चुनावों में जमकर नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई गईं। दोनों राज्यों में चुनावों के दौरान किए गए विस्तृत अध्ययन से पता चला है कि हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं की डराने धमकाने की घटनाएं बड़े पैमाने पर हुई। कुल मिलाकर दोनों राज्यों में हुए ये चुनाव मजाक बनकर रह गए।

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। पंजाब और पश्चिम बंगाल में मई 2008 में हुए पंचायत चुनावों में जमकर नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई गईं। दोनों राज्यों में चुनावों के दौरान किए गए विस्तृत अध्ययन से पता चला है कि हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं की डराने धमकाने की घटनाएं बड़े पैमाने पर हुई। कुल मिलाकर दोनों राज्यों में हुए ये चुनाव मजाक बनकर रह गए।

पंचायती राज के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था 'इंटस्टीट्यूट ऑफ सोशल साईंसेज' द्वारा चुनावों के दौरान करवाए गए एक अध्ययन में ये तथ्य उजागर हुए हैं। अध्ययन की अगुआई करने वाले प्रोफेसर पार्थनाथ मुखर्जी के अनुसार, " इन चुनावों के दौरान यह साफ हो गया कि इन दोनों राज्यों में लोकतंत्र एक दोराहे पर खड़ा है। "

दोनों राज्यों में विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करने के बाद संस्थान की टीम ने पाया कि पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ वाममोर्चे ने और पंजाब में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार ने नियम, कायदों और सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग अपने राजनीतिक हित साधने के लिए किया। पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने अपने विरोधियों से निपटने के लिए जमकर हथियारों का इस्तेमाल किया जबकि पंजाब में सरकारी मशीनरी के खुलेआम दुरूपयोग की घटनाएं सामने आईं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 11,14 और 18 मई को 17 जिलों में पंचायत चुनावों के लिए मतदान हुआ था। लगभग तीन करोड़ 75 लाख मतदाताओं को इन चुनावों में विभिन्न स्तरों पर 51000 पंचायती राज प्रतिनिधियों के चुनाव के लिए मताधिकार प्राप्त था। दूसरी ओर पंजाब में 12 और 26 मई को दो चरणों में चुनाव हुआ था।

रपट के अनुसार पंजाब में सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का खुलेआम उल्लंघन करते हुए पहले चरण के चुनाव परिणामों की घोषणा दूसरे चरण का मतदान होने से पहल ही कर दी गई। पहले चरण में शिरोमणि अकाली दल ने 85 ऊीसदी सीटों पर जीत हासिल की। इस चरण में 141 पंचायत समितियों के 2500 सदस्यों और 20 जिला परिषदों के 324 सदस्यों के लिए चुनाव हुआ था। इन चुनाव परिणामों की घोषणा के कारण दूसरे चरण के मतदान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा जिसमें 12,698 ग्राम पंचायतों के लिए 75000 पंच निर्वाचित करने के लिए मतदान हुआ था।

पश्चिम बंगाल में संस्थान की टीम ने पाया कि कमोबेश सभी जगहों पर ग्रामीण मतदाताओं में हिंसा का खौफ व्याप्त था। पंजाब में पैसे, शराब और बाहुबल का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होना पाया गया। पंजाब में दूसरे चरण के चुनाव के लिए नामांकन आरंभ होने के बाद अचानक ही आरक्षित और सामान्य सीटों में भारी उलटफेर कर दिया गया। रपट के अनुसार यह कदम किसी भी दृष्टि से लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुकूल नहीं कहा जा सकता।

रपट में कहा गया है कि जिस तरह इन दोनों राज्यों में लोकतंत्र को ताक पर रखकर ये चुनाव करवाए गए उसके दूरगामी परिणाम होंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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