खेल चिकित्सा, शारीरिक शिक्षा व खेल प्रशिक्षक में है रोजगार के अवसर

नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। खिलाड़ियों की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधी समस्याओं का ध्यान रखना कोई कठिन कार्य नहीं लगता। यहां आपको खिलाड़ी की सहायता करनी पड़ती है, ताकि वह धीरे-धीरे स्वास्थ्य संबंधी न्यूनतम स्तर से सर्वोच्च स्तर तक सजग हो सके। खेल जगत में मेडिसिन डाक्टर के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती है।

इस प्रकार यह विशेष क्षेत्र है। आपको कारकों का ध्यान रखना पड़ता है, जैसे मानसिक योग्यता (मेक-अप), स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम, चोट, रोग, पोषण, शरीर विज्ञान तथा खिलाड़ी का मनोविज्ञान। ये सभी तत्व खेल चिकित्सा के क्षेत्र का हिस्सा हैं।

वास्तविक परिप्रेक्ष्य से पहले आपको सभी मूलभूत बातों की जानकारी प्राप्त करनी होगी, ताकि समस्त बातों को समग्र रूप में देखा जा सके। आप चोट को हलके से नहीं ले सकते और न ही एथलीट (खिलाड़ी) को यह कह सकते हैं कि वह किसी और डाक्टर के पास इलाज कराए या सलाह ले। आपके पास बहुमुखी कौशल होने चाहिए क्योंकि एथलीट के पास इतना समय नहीं होता कि वह अलग-अलग तकलीफ ों के लिए अलग-अलग डाक्टरों के पास जा सके।

खेल चिकित्सा में भारी-भरकम रोगी के घुटने की सीधे सर्जरी करने से दुष्परिणाम सामने आएंगे लेकिन सर्जरी से पहले प्रभावित घुटने को अनुकूल स्थिति में लाने के लिए रोगी की सहायता करने तथा वजन घटाने की उपयुक्त विधियां सिखाकर बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। जब रोगी अपना वजन घटा लेता है तब वह जल्दी से स्वस्थ होगा और उसमें संतुलन भी आएगा, जिससे वह खेल जगत की गतिविधियां जारी रख सकता है।

खेल चिकित्सा या खेलों से जुड़े क्षेत्र में कैरियर चुनौती भरा होता है; लेकिन इसके गुणावगुण पर ध्यान देने से पूर्व भलीभांति विचार कर लेना चाहिए, क्योंकि प्रशिक्षण, समय की बाधाओं एवं वित्तीय स्थिति के कारण अलग-अलग मौके उपलब्ध होते हैं। आपको अपने आपसे यह प्रश्न पूछना चाहिए - ध्येय प्राप्त करने से पूर्व मैं इस कैरियर में कितना निवेश कर सकता हूं?

उदाहरणार्थ, प्रमाणित एथलीट प्रशिक्षक एवं भौतिक चिकित्सक को अन्य चिकित्सकों की अपेक्षा कम स्कूली शिक्षा की जरूरत पड़ती है। इसलिए शिक्षा में कम पैसा खर्च होता है। तथापि ये अत्यधिक प्रशिक्षित व्यावसायिक होते हैं और निरंतर एथलीट एवं अन्य खिलाड़ियों के संपर्क में रहते हैं। ये प्राय: सप्ताह के अंत में छुट्टी के दिन आपातकालीन स्थिति में नियमित चिकित्सा व्यवसायी के समान नहीं आते। विकलांग विज्ञान में ऐसे अनेक उपचार हैं जो दर्द तथा मांसपेशीय विकारों के लिए सुझाए जाते हैं। अधिकांश गोलियां ऐसी हैं, जिनके खाने की आदत नहीं पड़ती। कुछ गोलियों से बचा भी जा सकता है। स्टेरॉइड-रहित सूजन-रोधी उपचार तथा मांसपेशीय शिथिल कारकों की प्राय: राय दी जाती है। गठिया, टेंडीटिंस या श्लेष पुटी शोध जैसे सूजन संबंधी हालात में एनएसएआई उपचार से राहत मिलती है। गरदन में तनाव तथा कमर के निचले हिस्से में दर्द होने पर नियमित रूप से मांसपेशी के शिथिल कारक के सेवन से आराम मिलता है।

देश में प्रशिक्षण में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के पक्ष शामिल करने की कोई विशिष्ट नीति नहीं है, जबकि इन पक्षों का बार-बार उल्लेख किया जाता है। वस्तुत: ये सकारात्मक परिवर्तन बहुत पहले ही हो जाने चाहिए थे। सामान्यत: श्रम शक्ति संबंधी संसाधन कम हैं। डाक्टरों, वैज्ञानिकों तथा गुणवत्ता परीक्षण स्थापनाओं की संख्या भी कम है।

उदाहरण के तौर पर, मालिश करनेवालों को प्रशिक्षण देने के लिए न तो कोई स्कूल है, न ही कोई संगठन। थका देनेवाले खेल समारोह के बाद खिलाड़ियों के लिए मालिश कराना जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान मालिश कराने की जरूरत होती है, ताकि थकी-मांदी मांसपेशी को आराम मिले। उसे पुन: स्वास्थ्य लाभ मिल सके और आप तरोताजा, स्फ ूर्तिवान् हो सकें।

खेल जगत् के इन क्षेत्रों के संबंध में स्पष्ट नीतिगत निर्देशों का अभाव है। सामान्य तौर पर खेल जगत में भौतिक चिकित्सकों की कमी रही है तथा इन क्षेत्रों में इनकी आवश्यकता है। इस प्रकार खेलों के संबद्ध क्षेत्रों में ऐसे चिकित्सकों की मांग है। उच्च श्रेणी के ऐसे खिलाड़ियों आदि की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कोर्मिकों की मांग रहती है जो विभिन्न क्षेत्रों में अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रशिक्षण और स्वास्थ्य के लिए खेलों/ स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत संरचना के प्रबंधन की दृष्टि से योग्य और अनुभवी स्टाफ का नेटवर्क तैयार करने की जरूरत है। स्वास्थ और आरोग्यता के प्रति बढ़ती जागरूकता के परिणामस्वरूप आरोग्यता संबंधी मशीनों की लोकप्रियता और मांग बढ़ी है। इस क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षकों के साथ-साथ पोषणविदों के लिए भी संभावनाएं बढ़ी हैं। यदि आपका इन क्षेत्रों के प्रति झुकाव है और आप में उपयुक्त योग्यता है। आपको स्वास्थ्य (शारीरिक) शिक्षा या आहार-विज्ञान के क्षेत्र में अनुभव प्राप्त है तो इस क्षेत्र में नौकरियां उपलब्ध हैं।

इस क्षेत्र में तीन वर्षीय बीपीई/पीजी स्तर का स्वास्थ्य (शारीरिक) शिक्षा में डिप्लोमा कराया जाता है या जोनल चैंपियनशिप सहित इंटर विश्वविद्यालय चैंपियनशिप में दो बार भागीदारी के साथ स्नातक की डिग्री ली हो तथा दो वर्ष का व्यावहारिक अनुभव हो तो एक वर्ष का बीपी शिक्षा कार्यक्रम कराया जाता है। तीन वर्ष का बीपी शिक्षा कार्यक्रम भी कराया जाता है। इसमें निम्नलिखित विषय हैं - शारीरिक शिक्षा का परिचय, अंग्रेजी, भारतीय भाषा, संबंधित क्षेत्र के कौशल और प्रशिक्षण। दूसरे वर्ष में व्यायाम की किनिशियोलॉजी, शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी) तथा स्वास्थ्य (शारीरिक) शिक्षा के संबंध में मनोविज्ञान पर फोकस होता है।

(कैरियर संबंधी और अधिक जानकारी के लिए देखिए ग्रंथ अकादमी, नई दिल्ली से प्रकाशित ए. गांगुली और एस. भूषण की पुस्तक "अपना कैरियर स्वयं चुनें"।)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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