बांग्लादेश में विधि विशेषज्ञों ने किया आतंक विरोधी अध्यादेश का विरोध
ढाका, 16 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानून के जानकारों ने नए आतंक विरोधी अध्यादेश का विरोध किया है। इस कानून के तहत गैर जमानती वारंट जारी किया जा सकता है और आजीवन कारावास के अलावा मृत्युदंड तक दिया जा सकता है।
अपराध कानून के जानकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता शहादीन मलिक ने कहा कि इस नए कानून की कोई आवश्यकता नहीं थी और मौजूदा कानून से ही अपराधियों को दंडित किया जा सकता था।
मलिक ने कहा कि अधिक से अधिक आपराधिक कानून वाला समाज बर्बर होता है। पिछले कुछ दशकों में यहां कई आपराधिक कानून लाए गए हैं पर यह उद्देश्यों को पूरा करने में सफल नहीं हो पाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के कानूनों का दुरुपयोग होने से नागरिकों का कष्ट बढ़ा है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति इयाजुद्दीन अहमद ने पिछले दिनों आतंक विरोधी अध्यादेश, 2008 की घोषणा की थी। बांग्लादेश में गत हफ्ते इसके माध्यम से संदिग्ध आतंकियों के बैंक खाते जब्त कर लिए गए थे।
मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सारा हुसैन ने कहा कि मौजूदा कई कानून आतंकवाद से निपटने में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभा पाए हैं। ऐसे में नए आतंक विरोधी अध्यादेश की जरूरत ही नहीं थी। मौजूदा कानूनों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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