दिग्गज नेताओं को सुरक्षित संसदीय क्षेत्र तलाश

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव जैसे दिग्गज राजनेताओं से लेकर सचिन पायलट और जितिन प्रसाद जैसे युवा सांसदों ने परिसीमन के बाद उभरी नई तस्वीर में अपने-अपने लिए सुरक्षित संसदीय क्षेत्रों की तलाश तेज कर दी है।

आम चुनाव में अब साल भर से भी कम का समय बचा है। परिसीमन ने भारतीय राजनीति के कई दिग्गजों के संसदीय क्षेत्रों की शक्ल इस कदर बदल कर रख दी है इन्हें नए संसदीय क्षेत्रों की तलाश करनी पड़ रही है।

परिसीमन के तहत लोकसभा की 85 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई हैं। पहले ऐसी सीटों की संख्या 79 थीं। इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति की सीटें 41 से बढ़कर 48 हो गई हैं। ऐसे में कई आरक्षित सीटें सामान्य और कई सामान्य सीटें आरक्षित हो गई हैं।

उत्तरप्रदेश की शाहजहांपुर सीट इस्पात राज्यमंत्री जितिन प्रसाद की पारम्परिक सीट रही है। लेकिन परिसीमन में इसे आरक्षित कर दिया गया है। इसलिए प्रसाद को नई लोकसभा सीट की तलाश है।

इस बारे में पूछे जाने पर प्रसाद ने आईएएनएस को बताया, "यह तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को तय करना है कि मुझे कहां से चुनाव लड़ना चाहिए।"

कांग्रेस के एक अन्य युवा सांसद सचिन पायलट की स्थिति भी प्रसाद की ही तरह है। सचिन राजस्थान के दौसा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन परिसीमन के बाद दौसा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई है।

दिलचस्प बात यह भी है कि यदि गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल जाता है तो पायलट को कोई परेशानी नहीं होगी लेकिन लंबे आंदोलन के बाद भी गुर्जरों को आरक्षण नहीं मिला तो सचिन को भी नया संसदीय क्षेत्र तलाशना होगा।

लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को भी अपने मौजूदा संसदीय क्षेत्र के बारे में पुनर्विचार करना पड़ रहा है। आडवाणी गांधीनगर से लगातार संसद तक का सफर तय करते रहे हैं। लेकिन परिसीमन के बाद इस संसदीय क्षेत्र से कुछ पुराने इलाके कट गए हैं तो कुछ नए जुड़ गए हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सूत्रों का कहना है कि फेरबदल के बावजूद आडवाणी गांधीनगर से ही चुनाव लड़ेंगे।

लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी जिस बोलपुर संसदीय क्षेत्र से दस बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं, वह अब सामान्य श्रेणी में नहीं रह गई। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सूत्रों की मानें तो चटर्जी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन वे यदि लड़े तो उन्हें बर्दवान लोकसभा क्षेत्र से उतारा जा सकता है।

रेलमंत्री लालू यादव की छपरा लोकसभा सीट में परिसीमन के बाद काफी तब्दीलियां आ गई है। इसके कई विधानसभाओं को इधर-उधर कर दिया गया है। लालू के साले साधु यादव को भी नई सीट तलाशनी पड़ेगी क्योंकि उनकी मौजूदा गोपालपुर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है।

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती की पारम्परिक अकबरपुर संसदीय सीट सामान्य हो गई है जबकि समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव की इटावा लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई है।

बीकानेर के सांसद और सिने अभिनेता धर्मेन्द्र को लेकर भाजपा में कोई चिंता नहीं है। इस सीट की भौगोलिक स्थिति में भले ही कितनी तब्दीलियां आ गई हो, भाजपा उन्हें दोबारा टिकट देने के मूड में नहीं दिखती।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

**

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+