मिनर्वा मूवीटोन अपने नए अवतार में
मुंबई, 15 जून (आईएएनएस)। भारतीय फिल्मों के इतिहास में मिनर्वा मूवीटोन का क्या स्थान है? हिंदी फिल्मों की विकास यात्रा की थोड़ी सी समझ रखने वाला भी इसे बता सकता है। लेकिन ऐतिहासिक और माइथोलॉजिकल फिल्मों की जन्मस्थली भी अपने सितारों की तरह ही गुमनामी के अंधेरे में खो गई।
अतीत में झांके तो सोहराब मोदी की कालजयी फिल्मों झांसी की रानी, मिर्जा गालिब, शीशमहल और सिकंदर का हर शार्ट्स मिनर्वा मूवीटोन और उससे जुड़ी तमाम यादों की न अंत होने वाली दास्तान बयां करता है।
फिलहाल लेमिंग्टन रोड स्थित मिनर्वा मूवीटोन एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है लेकिन इस बार अपने अतीत की कारगुजारियों की याद ताजा करने के लिए नहीं, सोहराब मोदी की कालजयी फिल्मों के पुनरावलोकन के लिए नहीं बल्कि ओसियान -सिनेफैन फेस्टीवल के आयोजन के लिए। इसी दौरान इस थियेटर के नए अवतार से संबंधित माडल ओसियानामा का भी अवतरण हुआ।
इस नए अवतार में मिनर्वा के आंगन में चलती फिरती छवियों का सृजन नहीं बल्कि फिल्मों की यात्रा से संबंद्ध दस्तावेजों के रखरखाव के लिए इसे अनूठे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में मल्टीप्लैक्स, पुस्तकालय, मीडिया अभिलेख व कला वीथिका की व्यवस्था होगी।
इस माडल का प्रदर्शन एशियाई व अरब सिनेमा पर आधारित दसवें ओसियान -सिनेफैन फेस्टीवल के समापन सत्र में शनिवार की शाम को किया गया। इस अवसर पर शम्मी कपूर, आमिर खान, श्याम बेनेगल व बासु चटर्जी उपस्थित थे।
ओसियान के अध्यक्ष नैवेली के अनुसार दसवें ओसियान -सिनेफैन फेस्टीवल के आयोजन को भारी सफलता मिली और ओसियानामा के अवतरण को लेकर आम जनता , सिने आलोचकों व सिनेप्रेमियों के बीच काफी जिज्ञासा व उत्सुकता दिखी।
उनके अनुसार अगले 9 से 10 महीनों में ओसियान सांस्कृतिक केंद्र को मिनर्वा थियेटर में सफलतापूर्वक स्थपित कर दिया जाएगा और वर्ष 2009 के मध्य मे यह सांस्कृतिक केंद्र जनता के लिए समर्पित की जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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