सूचना आयुक्तों की भूमिका पर केजरीवाल ने उठाए सवाल
भोपाल, 14 जून (आईएएनएस)। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त अरविंद केजरीवाल का मानना है कि प्रदेश स्तर पर तैनात मुख्य सूचना आयुक्तों की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण सूचना के अधिकार का लाभ आम आदमी को नहीं मिल पा रहा है। मुख्य सूचना आयुक्त अपने अधिकारों का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जिसका लाभ लेकर सरकारी मशीनरी बेलगाम हो चुकी है।
भोपाल, 14 जून (आईएएनएस)। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त अरविंद केजरीवाल का मानना है कि प्रदेश स्तर पर तैनात मुख्य सूचना आयुक्तों की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण सूचना के अधिकार का लाभ आम आदमी को नहीं मिल पा रहा है। मुख्य सूचना आयुक्त अपने अधिकारों का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जिसका लाभ लेकर सरकारी मशीनरी बेलगाम हो चुकी है।
मध्यप्रदेश में प्रस्तावित जल नियामक आयोग पर विचार हेतु यहां आयोजित एक कार्यशाला में शिरकत करने आए केजरीवाल ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि एक तरह से सूचना के अधिकार में सबसे बड़ी बाधा वे ही लोग बन गए हैं जिन पर इसके अमल की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे अधिकारियों पर जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। इसी का नतीजा है कि मांगी गई सूचना समय पर नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि इस कानून में निर्धारित समय में सूचना नहीं देने पर जुर्माना किए जाने का प्रावधान है।
सूचना के अधिकार को लेकर लगातार सक्रिय रहने वाले केजरीवाल ने कहा कि देशवासियों को व्यवस्था सुधारने के लिए सूचना का अधिकार अंतिम व ऐतिहासिक अवसर दे रहा है मगर प्रशासनिक मशीनरी उसे छीनने पर आमादा है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सूचना आयुक्त किस तरह के दबाव में रहकर काम कर रहे हैं।
अन्य आयोगों से सूचना आयुक्त की तुलना करते हुए केजरीवाल ने कहा कि सूचना आयुक्तों के पास अधिकार के तौर पर ऐसे दांत हैं जिससे वे दोषियों को दंडित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि धारा 18 के तहत सूचना आयुक्त अधिकारियों से न केवल जानकारी ले सकते हैं बल्कि पुलिस का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों का उपयोग न करने वाले सूचना आयुक्त सीधे तौर पर देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। केजरीवाल के अनुसार अरुणाचल प्रदेश को छोड़कर देश में एक भी ऐसा सूचना आयुक्त नहीं है, जो जनता को सूचना के अधिकार का लाभ दिलाने के लिए सख्त कदम उठा रहा हो।
केजरीवाल ने मत व्यक्त किया कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक हस्तक्षेप से नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर होनी चाहिए। इसके लिए आवेदन मंगाए जाने चाहिए और उनके बारे में वेबसाइट के जरिए जनता की राय ली जानी चाहिए। ऐसा होने पर ही सक्षम सूचना आयुक्त मिल सकेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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