गोरखा समूह ने बुद्धदेव का बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया (लीड-1)
सिलीगुड़ी, 13 जून (आईएएनएस)। अलग 'गोरखालैंड' की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने प्रस्तावित अनिश्चितकालीन बंद को सोमवार तक के लिए टाल दिया है। साथ ही इस समूह ने राज्य सरकार के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया है।
जीजेएम ने मांग की थी कि राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार को भी प्रस्तावित बातचीत का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
जीजेएम के महासचिव रोशन गिरी ने आईएएनएस को बताया, "राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी ने हमारे अध्यक्ष बिमल गुरूंग को पत्र भेजकर शांति बनाए रखने की अपील की है। राज्यपाल की अपील और सरकार के इस आश्वासन के बाद कि हमारे समर्थकों पर अत्याचार नहीं किया जाएगा, हमने हड़ताल को दो दिनों के लिए स्थगित करने का फैसला किया है।"
उन्होंने बताया कि जीजेएम ने मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा 18 जून को की गई बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार दार्जिलिंग क्षेत्र के विकास के बारे में बातचीत करना चाहती है जबकि हम इसे राजनीतिक मामला मानते हैं। हम इस मामले का राजनीतिक हल चाहते हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने आज सुबह गुरूंग को पत्र लिखकर बातचीत करने का आमंत्रण भेजा था।
गोरखालैंड की मांग के कारण बांग्ला भाषी समूहों के साथ हुई झड़प के बाद इलाके में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। उधर, बढ़ते तनाव के मद्देनजर क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिरीक्षक (कानून और व्यवस्था) राज कनौजिया ने आईएएनएस को बताया, "अर्धसैनिक बल की तीन कंपनियां सिलीगुड़ी पहुंच गई हैं और इन्हें क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है।"
कनौजिया ने कहा कि क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा गुरुवार रात के बाद किसी प्रकार की अप्रिय घटना का समाचार प्राप्त नहीं हुआ है। सिलीगुड़ी शहर में चार से अधिक व्यक्तियों के एक साथ जमा होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
गौरतलब है कि दो विरोधी गुटों के बीच गुरुवार को हुए संघर्ष में बम फेंके गए थे और पुलिस वाहनों में आग लगा दी गई थी। इन घटनाओं में नौ पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
दार्जिलिंग जिले के प्रधाननगर पुलिस स्टेशन इलाके में स्थित भक्तिनगर और सिलीगुड़ी में धारा 144 लागू कर दी गई है। सिलीगुड़ी के हिंसाग्रस्त इलाकों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और इंडियन रिजर्व बटालियन (आईआरबी) के जवान गश्त लगा रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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