विक्टोरिया में शोषण का शिकार हो रहे हैं भारतीय छात्र
सिडनी, 13 जून (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में अंशकालिक नौकरियों में लगे भारतीय छात्रों समेत लगभग 60 प्रतिशत विदेशी छात्रों को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम पारिश्रमिक मिलता है।
सिडनी, 13 जून (आईएएनएस)। आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में अंशकालिक नौकरियों में लगे भारतीय छात्रों समेत लगभग 60 प्रतिशत विदेशी छात्रों को निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम पारिश्रमिक मिलता है।
यह तथ्य एक ताजा अध्ययन के बाद सामने आया है जिसे गुरुवार को जारी किया गया। इससे पहले यहां के टैक्सी चालकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इन प्रदर्शनकारियों में ज्यादातर भारतीय छात्र थे, जो विकट परिस्थितियों में टैक्सियां चलाते हैं।
यह अध्ययन मोनाश और मेलबर्न विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों ने किया है, जो 200 विदेशी छात्रों के साथ बातचीत पर आधारित है। ये छात्र विक्टोरिया प्रांत के नौ अलग अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ते हैं।
अध्ययन में शामिल छात्रों में से 58.1 प्रतिशत को प्रति घंटे 15 आस्ट्रेलियाई डालर से भी कम पारिश्रमिक मिलता है, जबकि 33.9 प्रतिशत छात्रों को 10 आस्ट्रेलियाई डालर से भी कम भुगतान किया जाता है।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया है कि ज्यादातर विदेशी छात्र विश्वविद्यालयों का पूरा शुल्क चुकाते हैं और इसलिए उन पर अंशकालिक नौकरी करने का दबाव होता है, जबकि स्थानीय लोग नहीं चाहते कि ये छात्र नौकरी करें।
टैक्सियां चलाने के अलावा ये छात्र अपनी आर्थिक मदद के लिए रात में दफ्तरों, फास्ट फूड कैफे एवं रेस्तरां की सफाई के अलावा कई दूसरी अंशकालिक नौकरियां भी करते हैं जिसके एवज में उन्हें बहुत कम पारिश्रमिक दिए जाते हैं।
अध्ययन में पाया गया है कि ज्यदातर भारतीय छात्र अपनी मुश्किलों को जाहिर करना नहीं चाहते और वे चुपचाप अपना शोषण बर्दाश्त करते जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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