औद्योगिक उत्पादन में गिरावट से अर्थव्यवस्था पर गहराए संकट के बादल ( लीड-1)

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। महंगाई पर नियंत्रण पाने की कवायद के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी किए जाने के एक दिन बाद ही अप्रैल 2008 के लिए आए कमजोर औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

कें द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) से गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2008 के दौरान औद्योगिक उत्पादन में विकास की दर सात फीसदी रही। बाजार विशेषज्ञों को अनुमान था कि यह 6.5 फीसदी के आसपास रहेगी। पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान औद्योगिक विकास दर 11.3 फीसदी रही थी। मार्च 2008 के दौरान औद्योगिक विकास दर 3.9 फीसदी थी।

समीक्षाधीन माह के दौरान विनिर्माण क्षेत्र में विकास दर पिछले वर्ष की समान अवधि के 12.4 फीसदी की तुलना में 7.5 फीसदी दर्ज की गई।

सीएसओ के अनुसार अप्रैल 2008 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 8.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। अप्रैल 2006-07 को समाप्त हुए वर्ष के दौरान औद्योगिक उत्पादन में 11.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी।

उधर, वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडी इन्वेस्टर्स सर्विस ने संभावना जताई है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ब्याज दरों में और वृद्धि की घोषणा कर सकता है। एजेंसी द्वारा घरेलू अर्थव्यवस्था में नरमी की आशंका भी व्यक्त की गई है।

देश में बढ़ रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को लिक्वि डिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी यानी तरलता आपूर्ति प्रबंधन (एलएएफ) के तहत रेपो रेट में चौथाई फीसदी यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की घोषणा की थी। अब यह 7.75 फीसदी से बढ़कर 8 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिसे अन्य बैंकों को केंद्रीय बैंक से प्राप्त उधार के लिए अदा करना होता है।

रेटिंग एजेंसी से जारी रिपोर्ट के अनुसार कड़े मौद्रिक उपायों का घरेलू खपत और निवेश पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर की वजह से मौजूदा वर्ष के दौरान घरेलू अर्थव्यवस्था की विकास दर में कमी आ सकती है।

एजेंसी के अनुसार 'मूडी इकोनोमी डाट कम' ने यह संभावना जताई है कि वर्ष 2008 के दौरान घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास दर वर्ष 2007 के 8.9 फीसदी के मुकाबले गिरकर 8 फीसदी तक आ सकती है।

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) से जारी आंकड़ों के अनुसार 24 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई की दर बढ़कर 8.24 फीसदी तक पहुंच गई थी। इन आंकड़ों में हालांकि पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि के असर शामिल नहीं हैं, क्योंकि कीमतों में वृद्धि की घोषणा 4 जून को की गई थी।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 31 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान जारी किए जाने वाले आंकड़ों में महंगाई दर बढ़कर 9 फीसदी को पार कर सकती है। अंतिम बार महंगाई दर 9 फीसदी के ऊपर अगस्त 1995 में गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा 29 जून को करेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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