जावा में भी आराध्य हैं भगवान राम

भोपाल, 12 जून (आईएएनएस)। भारत की तरह जावा द्वीप में भी भगवान राम पूजे जाते हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में जावा भारत से आगे है। वहां मंदिर तो हैं ही इमारतों से लेकर थिएटर, संस्थान और दुकानों के नाम भी राम और सीता से जुड़े हुए हैं।

भोपाल में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय रामलीला मेला में हिस्सा लेने आए जावा दल के मुखिया ताजबीर का मानना हैं कि राम और रामायण के मामले में भारत तथा जावा काफी हद तक एक ही तरह के हैं।

ताजबीर बताते हैं कि बच्चों के नाम भी राम और सीता पर रखे जाते हैं। जावा के युवाओं के तो हीरो ही राम हैं। वे राम की तरह देश हित और समाज हित के लिए काम करना चाहते हैं। राम ने जिस तरह बुराई के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी उसे यहां का युवा आगे भी जारी रखना चाहता हैं। जावा में मंदिरों की कमी नहीं हैं। हिन्दू धर्म को मानने वाले बड़ी संख्या में हैं और वे राम के अलावा अन्य देवी देवताओं की भी पूजा करते हैं।

हिन्दू धर्म और मंदिरों का जिक्र छिड़ने पर ताजबीर बताते हैं कि जावा में परम्बानान मंदिर हैं जो ईसा पूर्व 850 में बना था। इस मंदिरों के समूह में विष्णु, शिव, ब्रह्मा, गरूण, नन्दी, सहित नौ देवताओं के मंदिर हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इसके चारों ओर पूरी रामायण लिखी गई हैं। यह दुनिया का संभवत: इकलौता मंदिर है जिसका भ्रमण कर रामायण को भी पढा जा सकता है।

जावा का यह दल पिछले 47 सालों से रामायण का मंचन करता आ रहा है और पहली बार मध्य प्रदेश में आया है। इस दल द्वारा रामायण का मंचन किसी भाषा या बोली के जरिए नहीं बल्कि संगीत को आधार बनाकर किया जाता है। डेढ़ घंटे में यह दल राम के जन्म से लेकर राज्याभिषेक तक का मंचन करता है। 12 सदस्यों के इस दल ने पुरूष एवं महिला कलाकरों का समायोजन है।

ताजबीर अपने दल की अब तक की सवरेत्कृष्ट प्रस्तुति का जिक्र करते हुए बताते हैं कि एक बार परम्बानान मंदिर की पृष्ठ भूमि में एक साथ ढाई सौ कलाकारों ने रामायण का मंचन किया था। दो घंटे के इस नृत्यनाट्य में पूरी रामायण का मंचन किया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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