ज्ञानेंद्र ने भाई की हत्या में अपना हाथ होने से इंकार किया
काठमांडू, 11 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र ने नारायणहिती से रुखसत होने से पहले बुधवार को महल में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि उनके भाई वीरेंद्र की हत्या में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
काठमांडू, 11 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र ने नारायणहिती से रुखसत होने से पहले बुधवार को महल में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि उनके भाई वीरेंद्र की हत्या में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।
ज्ञानेंद्र ने कहा कि वीरेंद्र के पांच साल के शासन काल के दौरान उन्हें या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को कभी कोई तकलीफ नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1950 में बचपन में ही उन्हें जबरन ताज पहना दिया गया था। वर्ष 2001 में उन्हें दूसरी बार नरेश बनाया गया। लेकिन राजा बनने की उनकी इच्छा कभी नहीं रही।
ज्ञानेंद्र ने कहा, "ताज हासिल करने की न तो कभी मेरी इच्छा हुई और न ही मैने कभी इस बारे में सोचा।"
पूर्व नरेश को बुधवार को महल छोड़ से पहले उन्होंने अपने पूर्व सहयोगियों से फोन पर बातचीत कर उनसे विदा ली और उनके प्रति आभार जताया।
पिछले कुछ वर्षो से सत्ता के केंद्र में रहे ज्ञानेन्द्र ने अपने विश्वासपात्र पूर्व प्रधानमंत्रियों से टेलीफोन पर बात की।
नेपाल की साप्ताहिक पत्रिका 'घटना र बिचार' ने बुधवार को इस संबंध में खबर प्रकाशित की है। ज्ञानेन्द्र ने वर्ष 2002 में देश के प्रधानमंत्री रहे लोकेन्द्र बहादुर चंद से भी बातचीत की। उल्लेखनीय है कि चंद को ज्ञानेन्द्र ही ने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया था।
ज्ञानेन्द्र ने देश के पूर्व प्रधानंमत्रियों तुलसी गिरि और कीर्ति निधि बिष्ट से भी बातचीत की। उन्होंने इन सभी नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, "आप सभी ने मेरे बड़े भाई और मुझे सहयोग दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।"
ज्ञानेन्द्र के भविष्य को लेकर उनके समर्थकों में चिंता भी है। इस संबंध में पूर्व नरेश ने कहा, "आप चिंता नहीं करें, सब कुछ ठीक हो जाएगा। समय हर घाव को भर देता है।"
गौरतलब है कि ज्ञानेन्द्र अब काठमांडू से बाहर नागार्जुन महल में रहेंगे। इस महल को पहले राजपरिवार का 'समर पैलेस' कहा जाता था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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