महल छोड़ने से पहले ज्ञानेन्द्र ने सहयोगियों से कहा 'अलविदा'

काठमांडू, 11 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र ने नारायणहिती से रुखसत होने और आम आदमी के रूप में नए सिरे से जिंदगी शुरु करने से पहले अपने पूर्व सहोयगियों को अलविदा कहा।

काठमांडू, 11 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेन्द्र ने नारायणहिती से रुखसत होने और आम आदमी के रूप में नए सिरे से जिंदगी शुरु करने से पहले अपने पूर्व सहोयगियों को अलविदा कहा।

पूर्व नरेश को बुधवार को महल छोड़ देना है, लेकिन जाने से पहले उन्होंने अपने पूर्व सहयोगियों से फोन पर बातचीत कर उनसे विदा ली और उनके प्रति आभार जताया।

पिछले कुछ वर्षो से सत्ता के केंद्र में रहे ज्ञानेन्द्र ने अपने विश्वासपात्र पूर्व प्रधानमंत्रियों से टेलीफोन पर बात की। संविधान सभा द्वारा देश को गणतंत्र बनाए जाने की घोषणा के साथ ही 239 वर्ष पुरानी राजशाही समाप्त हो गई।

नेपाल की साप्ताहिक पत्रिका 'घटना र बिचार' ने बुधवार को इस संबंध में खबर प्रकाशित की है। ज्ञानेन्द्र ने वर्ष 2002 में देश के प्रधानमंत्री लोकेन्द्र बहादुर चंद से भी बातचीत की। उल्लेखनीय है कि चंद को ज्ञानेन्द्र ही ने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया था।

ज्ञानेन्द्र ने देश के पूर्व प्रधानंमत्रियों तुलसी गिरि और कृति निधि बिस्ता से बातचीत की। उन्होंने इन सभी नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, "आप सभी ने मेरे बड़े भाई और मुझे समर्थन दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं।"

ज्ञानेन्द्र के भविष्य को लेकर उनके समर्थकों में चिंता भी है। इस संबंध में पूर्व नरेश ने कहा, "आप चिंता नहीं करें, सबकुछ ठीक हो जाएगा। समय हर घाव को भर देता है।"

गौरतलब है कि ज्ञानेन्द्र अब काठमांडू से बाहर नागार्जुन महल में रहेंगे। इस महल को पहले राजपरिवार का 'समर पैलेस' कहा जाता था। माना जा रहा है कि बुधवार रात को शाही महल से विदा होने से पूर्व ज्ञानेन्द्र एक संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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