रेपो रेट में वृद्धि पर बैंकों की मिली -जुली प्रतिक्रिया (लीड-3)

मुंबई, 11 जून (आईएएनएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) द्वारा रेपो रेट में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी किए जाने को लेकर विभिन्न बैंकों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है।

केनरा बैंक के मुख्य प्रबंध निदेशक एम.बी.एन. राव ने आईएएनएस को बताया कि हम जमा पूंजी पर ब्याज दर में वृद्धि नहीं करेंगे। हकीकत में केंद्रीय बैंक के इस कदम का बैंकिंग प्रणाली पर सकारात्मक असर होगा।

यूनियन बैंक के अध्यक्ष एम. बी. नायर के अनुसार यह केंद्रीय बैंक की तरफ से अन्य बैंकों को साफ संदेश है कि वे अपनी मुद्रा की तरलता का खुद प्रबंधन करें। जमा पूंजी पर ब्याज दरों व प्रमुख उधार दर यानी पीएलआर में वृद्धि के संबंध में उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन दिनों में इस मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा।

एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक के. के. मिस्त्री ने बताया कि हमें इस बात की संभावना दिखाई दे रही है कि विभिन्न बैंक जून के अंत तक उधार दरों में वृद्धि कर सकते हैं।

देश में बढ़ रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को लिक्वि डिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी यानी तरलता आपूर्ति प्रबंधन (एलएएफ) के तहत रेपो रेट में चौथाई फीसदी यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की घोषणा की है। अब यह 7.75 फीसदी से बढ़कर 8 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह ब्याज दर है जिसे अन्य बैंकों को केंद्रीय बैंक से प्राप्त उधार के लिए अदा करना होता है।

बैंक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार नई दर तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। हालांकि बैंक ने रिवर्स रेपो रेट (जिस दर पर केंद्रीय बैंक अन्य व्यवसायिक बैंकों से उधार लेता है) को 6 फीसदी के स्तर पर अपरिवर्तित रखा है। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को भी यथावत रखा गया है। बैंक ने मार्च 2007 के बाद पहली बार रेपो रेट में वृद्धि की है। नवंबर 2002 के बाद रेपो रेट अपने उच्चतम स्तर पर है। इससे पहले गत 29 अप्रैल को केद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक समीक्षा नीति में सीआरआर यानी नकद आरक्षित अनुपात को एक महीने में लगातार दूसरी बार 8 फीसदी से बढ़ाकर 8.25 फीसदी कर दिया था।

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) से जारी आंकड़ों के अनुसार 24 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान देश में महंगाई की दर बढ़कर 8.24 फीसदी तक पहुंच गई थी। इन आंकड़ों में हालांकि पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि के असर शामिल नहीं हैं, क्योंकि कीमतों में वृद्धि की घोषणा 4 जून को की गई थी।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि 31 मई को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान जारी किए जाने वाले आंकड़ों में महंगाई दर बढ़कर 9 फीसदी को पार कर सकती है। अंतिम बार महंगाई दर 9 फीसदी के ऊपर अगस्त 1995 में गई थी। भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा 29 जून को करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में चौथाई फीसदी यानी 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद उपभोक्ताओं के लिए आवास, आटो मोबाइल व अन्य लोन महंगे हो जाएंगे।

इंडो - एशियन न्यूज सर्विस।

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