12 वर्षो से धूल चाट रहा है महिला आरक्षण विधेयक
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण संबंधी 'महिला आरक्षण विधेयक' विगत 12 सालों से धूल चाट रहा है।
यह महत्वपूर्ण विधेयक कानून बनने के लिए विगत 12 सालों से इंतजार कर रहा है। इससे जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां-
- वर्ष 1996 में एच.डी. देवगौड़ा सरकार ने 81वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में 4 सितंबर 1996 को महिला आरक्षण विधेयक पेश किया।
- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की सांसद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में एक संयुक्त संसदीय समिति को यह विधेयक भेजा गया।
-संयुक्त संसदीय समिति ने 9 दिसंबर 1996 को इससे संबंधित अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश की।
-एक बार फिर 26 जून 1998 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने 84 वें संविधान संसोधन विधेयक के रूप इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया।
-राजग सरकार ने 22 नवंबर 1999 को इस विधेयक को पुन: लोकसभा में पेश किया।
- राजग सरकार ने वर्ष 2002 और 2003 में लोकसभा में इस विधेयक को पेश किया लेकिन इसे पारित नहीं किया जा सका।
-संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने मई 2004 में विधेयक को पारित कराने को लेकर कदम बढ़ाने की घोषणा की।
-संप्रग सरकार ने आज कहा कि वह इस विधेयक को इसी सत्र में लाएगी, लेकिन अचानक लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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