विपक्ष और लोकसभा अध्यक्ष के बीच गतिरोध थमा (लीड)
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। गैर-मर्यादित आचरण के सिलसिले में 32 सांसदों के नाम विशेषाधिकार समिति के हवाले किए जाने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी को आज अपने रूख में नरमी लानी पड़ी।
चटर्जी ने सोमवार को संसद में कहा, "मैं इस मामले पर पुनर्विचार करूंगा और मैं इसे वापस लेता हूं।"
लोकसभा अध्यक्ष ने लोकसभा में सदन के नेता प्रणव मुखर्जी और विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी के अनुरोध पर अपना यह फैसला सुनाया।
मुखर्जी और आडवाणी ने लोकसभाध्यक्ष से अनुरोध किया वह विशेषाधिकार समिति को भेजे गए सभी 32 सांसदों के मामले पर पुनर्विचार करें।
इससे पहले, सदस्यों के आचरण से संबंधित इस मुद्दे पर गतिरोध टालने के लिए लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में एक सर्वदलीय बैठक हुई। बैठक में सभी दलों के सदन के नेताओं ने हिस्सा लिया।
बैठक में विपक्ष और अध्यक्ष के बीच टकराव रोकने के बारे में लगभग डेढ़ घंटे चर्चा चली। अंतत: तय हुआ कि लोकसभा अध्यक्ष इस मामले पर पुनर्विचार करेंगे और फिर वापस ले लेंगे।
इससे पहले, आज जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही प्रारंभ हुई तो राजग सदस्यों ने मुंह पर ऊंगली रख कर सदन में प्रवेश किया और अपनी अपनी सीट पर बैठ गए।
इसी बीच, अध्यक्ष ने गांधीवादी नेता निर्मला देशपांडे के निधन पर शोक जताया और फिर सभी सांसदों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इसके बाद समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन और तेलगुदेशम पार्टी अभी अपनी सीट पर खड़े होकर कुछ बोलना ही चाह रहे थे कि चटर्जी ने बड़े ही आश्चर्यजनक अंदाज में सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।
इस प्रकार से संसदीय कार्यवाही को स्थगित किये जाने से सभी सदस्य हक्के -बक्के रह गए।
उधर, विशेषाधिकार मामले में संसद के अंदर अपनी रणनीति तय करने के लिए सुबह राजग नेताओं की बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि सभी सदस्य लोकसभा अध्यक्ष का मौन विरोध करेंगे। इस दौरान वे न तो सवाल पूछेंगे और ना ही कुछ कहेंगे।
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के कथित आरोप में चटर्जी ने 32 सांसदों के नाम विशेषाधिकार समिति के हवाले कर दिया था। इनमें से अधिकांश सांसद विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सदस्य थे।
इन सदस्यों ने आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को लेकर सदन की कार्यवाही में बाधा डाली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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