लक्ष्यों से पिछड़ रहा है ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन
उदयपुर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद 'राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन' (एनआरएचएम) अपने लक्ष्यों में कामयाब होता नहीं दिख रहा है।
उदयपुर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद 'राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन' (एनआरएचएम) अपने लक्ष्यों में कामयाब होता नहीं दिख रहा है।
इस मिशन का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पतालों में सुरक्षित ढंग से प्रसूति करवाने के लिए प्रेरित करना था।
लेकिन अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ के अनुसार आज भी भारत में आज 50 फीसदी महिलाएं घरों में ही बच्चों को जन्म दे देती हैं।
भारत में यूनिसेफ के स्वास्थ्य विभाग केवरिष्ठ अधिकारी मारजियो बेबिल ने बताया कि विश्व में जन्म के दौरान मरने वाले कुल शिशुओं में 20 फीसदी भारत के हैं।
उदयपुर में एक राष्ट्रीय स्तरीय स्वास्थ्य सम्मेलन में भाग लेने आए बेबिल ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा, "बीते वर्ष 75 लाख महिलाओं में से केवल 52 फीसदी महिलाओं को ही जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला था।"
उन्होंने बताया कि भारतीय बच्चों में कुपोषण का स्तर भी नहीं सुधरा है। सात वर्ष पूर्व जहां भारत में 47 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार थे वहीं अब यह आंकड़ा घटकर मात्र 46 फीसदी हुआ है।
यही नहीं यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग 21 लाख बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन मनाने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
इस अधिकारी का मानना है कि जागरूकता के अभाव में भी लोग ऐसी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
यूनिसेफ के इस अधिकारी ने एनआरएचएम की सफलता के लिहाज से मध्य प्रदेश, असम और उड़ीसा की प्रशंसा की जबकि उत्तर प्रदेश को इस और अधिक ध्यान देने की हिदायत दी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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