उत्तर प्रदेश में ग्रामीण परम्परागत उद्योग को बचाएंगे खादी शिल्प ग्राम
लखनऊ, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश में ग्रामीण इलाकों के परम्परागत उद्योग सालों से बदहाली के दौर से गुजर रहे थे। लेकिन अब सरकार का ध्यान इस ओर भी गया हैं लिहाजा अपनी अचूक कला धरोहर को बचाने के लिए शासन ने प्रदेश के हर जिले में खादी शिल्प ग्राम खेलने का फैसला लिया है।
इन उद्योगों को बेहतरीन ढंग से संचालित करनें के लिए सरकार नें हाल में प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अफसरों को दक्षिण भारतीय राज्यों के दौरे पर भी भेजा था। शासन का मानना है कि दक्षिण भारत में लोग अपना कला व संस्कृति के प्रति बेहद जागरुक रहते हैं। यही वजह है कि वहां ग्रामीण इलाकों में चल रहे पराम्परागत उद्योग दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति कर रहे हैं। लिहाजा उनकी कार्यशैली जाननें के लिये यह दौरा महत्वपूर्ण समझा गया।
उधर अभी वहां से लौटकर आए अधिकारियों ने फैसला लिया कि यहां इन उद्योगो को बचानें के लिए सबसे पहले क्लस्टर प्रणाली को अहमियत दी जाएगी यानी उद्योगों को एक ही जगह पर विपणन, प्रशिक्षण और आधारभूत ढांचे की सुविधा सरकार देगी। विभागीय सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि हमने यह खाका मंगलौर के कलाग्राम की तर्ज पर तैयार करने का फैसला लिया है। यहां उद्योगों में क्लस्टर तरीका अपनाने से अब ग्रामीण उद्योगों की एक श्रृंखला विकसित हो गई है।
सूत्रों ने जानकारी दी कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में जिलाधिकारियों की मदद से शिल्प ग्राम के लिए भूमि चिन्हित करने की कवायद शुरु कर दी गई है। इस योजना के पहले चरण में 14 जिलों का चयन किया जा रहा है। इन शिल्प ग्रामों में क्लस्टर में विभिन्न प्रकार की पच्चीस- तीस इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इसके तहत प्रदेश की अद्भुद जरदोजी पैचवर्क,चिकन और चर्म के कामों को अब नया आयाम दिया जायेगा।
इकाई लगाने वाले उद्यमियों को प्रशिक्षित करनें का काम खुद खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग करेगा लेकिन इनके विपणन की व्यवस्था इन शिल्प ग्राम से बाहर विपणन केन्द्रमें की जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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