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सिमी का धर्म प्रचार से आतंक तक का सफर

By Staff
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    संदीप पौराणिक

    संदीप पौराणिक

    भोपाल, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। इस्लाम के प्रचार के लिए स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेन्ट आफ इंडिया (सिमी) की आधारशिला रखी गई थी। यह संगठन धर्म के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर पाया मगर इस्लाम के खिलाफ उसने वह सब कुछ किया जिसको इस्लाम ने गलत करार दिया है।

    सिमी ने चालीस साल के सफर में ऐसी वारदातें की हैं जिसने इस्लाम और मानवता को शर्मसार करने का काम किया है। इतना कुछ करने के बाद संगठन ने अपना नाम ही बदल लिया है। संगठन का नाम अब स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेन्ट (सिम) हो गया है।

    बात कोई चार दशक पुरानी है जब अप्रैल 1977 में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिमी की आधारशिला रखी गई थी। इसके गठन का मकसद इस्लाम का प्रचार करना और मजहब के लिए जेहाद करने के लिए नौजवानों को तैयार करना था। सिमी ने शुरुआत में उन मकसदों के लिए काम किया जिनके लिए वह बना था।

    कुछ साल गुजरने के बाद सिमी का तौर तरीका ही बदल गया। विचारधारा बदली तो उसने मूर्ति पूजा का सीधे तौर पर विरोध करना शुरू कर दिया। सिमी के कार्यकर्ता धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ खड़े होने लगे और लादेन को अपना सच्चा हितैषी बताने तक में हिचक नहीं दिखाई।

    सिमी का जब चेहरा बदला तो उसमें खुल कर दो दल आए। एक नरम पंथी था तो दूसरा गरम मिजाज का। आगे चलकर हालत यह हुई कि आतंकवाद समर्थकों ने 34 साल की उम्र से ऊपर वालों को अपने साथ रखना ही बन्द कर दिया। 1993 में सिमी का आतंकी चेहरा खुलकर सामने आ गया। कश्मीर में एक सिख आतंकवादी पकड़ा गया था जिसने इस बात का खुलासा किया था कि सिमी अब आतंकी गतिविधियों का सहारा लेने लगा है।

    सिमी ने देश के बाहर अपना सम्पर्क स्थापित करने के बाद देश में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अपना जाल तेजी से बिछाया। इस पर पहली बार पाबंदी 2001 में लगी। यह पाबंदी आज तक जारी है। यह संगठन मुंबई के सीरियल बम ब्लास्ट, समझौता एक्सप्रैस, गुजरात दंगे, उत्तर प्रदेश के बम विस्फोट जैसी दर्जनों वारदातों को अंजाम दे चुका है।

    जानकारी के मुताबिक सिमी के कार्यकर्ता बच्चों से लेकर महिलाओं तक में देश के खिलाफ माहौल बनाने में आगे रहते हैं। वे इसके लिए शिक्षा का सहारा लेते हैं। वर्तमान में सिमी के पास चार सौ पूर्ण कालिक और बीस हजार कार्यकर्ताओं की फौज हैं। इसका तीन शब्दों पर जोर होता हैं इक्वान, आवान और अवसान। इनके जरिए लोगों में धर्मिक भावनाए भड़काई जाती हैं।

    चार दशक तक सिमी ने सक्रिय रहकर अपने मंसूबों को अंजाम दिया है। अब वह अपने नाम को ही बदल चुका है। उसका लक्ष्य अब सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया है। वे अपने नेटवर्क को हर उस जगह ले जाना चाहते हैं जहां से वे अपने मंसूबों को पूरा कर सकें। मध्य प्रदेश में सिमी पर प्रतिबन्ध है, क्या यह नए नाम सिम पर भी रहेगा। इस पर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ए़ आऱ पवार का कहना है कि प्रतिबन्ध नाम पर नहीं बल्कि उसकी गतिविधियों के आधार पर लगा है इसलिए सिम भी सिमी की तरह कार्य करता है तो उस पर भी कानूनी कार्रवाई होगी।

    इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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