ब्रिटेन में वीजा नीति मामले में प्रवासियों ने जीती कानूनी लड़ाई (लीड-1)
लंदन, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। ब्रिटिश अदालत द्वारा 'हायली स्किल्ड माइग्रेंट प्रोग्राम' (एचएसएमपी) के तहत वीजा में किए गए संशोधन को अवैध करार दिए जाने के बाद यहां रह रहे हजारों कुशल भारतीय पेशेवरों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है।
दरअसल, ब्रिटेन की सरकार ने वर्ष 2006 में यहां रह रहे पेशेवरों के वीजा में संशोधन कर दिया था जिस कारण उन्हें वीजा के लिए दोबारा आवेदन करना पड़ता। इससे लगभग 49 हजार प्रवासियों का भविष्य दांव पर लगा हुआ था।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि सरकार द्वारा उनके वीजा में जो परिवर्तन किए गए हैं वे अवैध हैं। न्यायधीश सर जार्ज न्यूमैन ने अपने इस ऐतिहासिक फैसले में कहा कि वीजा संबंधी पुराने नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि पुराने नियम के तहत यहां रह रहे लोगों को इससे वंचित किया जाए।
वर्ष 2002 में एचएसएमपी की शुरुआत ब्रिटेन में चिकित्सकों, इंजीनियरों, लेखाकारों और सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के पेशेवरों की कमी को दूर करने के लिए की गई थी लेकिन 2006 में इसे बदल दिया गया।
नियमों में अचानक परिवर्तन के बाद कहा गया कि इस वीजा पर पहले से रह रहे लोगों को अब नये नियमों के तहत दोबारा आवेदन करना होगा।
अगर इस मामले का निर्णय भारतीयों के खिलाफ आता तो भारत से अच्छी खासी नौकरियां छोड़ कर आए इन लोगों को वापस लौटना पड़ता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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