भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिकों ने पर्यावरण अनुकूल कपड़े किए तैयार

न्यूयॉर्क, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इन दिनों कपड़े भी पर्यावरण के अनुकूल बनाए जा रहे हैं। बांस से तैयार किए जा रहे ये परिधान लंबे समय तक आपका साथ देने वाले हैं।

भारतीय-अमेरिकी रसायनशास्त्री सुभाष अपिडी और कोलोरैडो राज्य विश्वविद्यालय के अजय सरकार ने ऐसे कपड़ों को बढ़ावा देना शुरू भी कर दिया है।

उन्होंने बांस के कपड़े तैयार करने के तरीके ढूंढ निकाले हैं। इन दिनों नैतिक तरीकों से तैयार जो कपड़े बाजार में हैं, वे सूर्य की पराबैंगनी किरणों से तो बचाती ही हैं, उनमें अजैविक गुण भी हैं।

अपीडी के अनुसार, सभी सैलूलोज रेशे कपड़ों में ज्यादा आद्र्रता रिसने देते हैं जिससे बैक्टीरिया को अधिक खाना उपलब्ध हो जाता है। यही कारण है कि सिंथेटिक रेशे के मुकाबले प्राकृतिक रेशों में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं।

अस्पतालों के लिए बैक्टीरिया मुक्त परिधान बनाने का सपना देखने वाले अपीडी ने महसूस किया कि ये बैक्टीरिया कपड़ों में बदबू और गंदगी बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

गौरतलब है कि भारत, जापान, चीन सहित कुछ अन्य देशों में भी बांस के ये मुलायम, लंबे समय तक चलने वाले कपड़े मौजूद हैं जो सिल्क से भी ज्यादा आकर्षित करने वाले होते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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