भारत में संक्रामक रोगों के बढ़ने की संभावना : डब्लूएचओ
नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। ग्लोबल वार्मिग के कारण दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया को संक्रामक रोगों, जलजनित रोगों और कुपोषण को बड़े पैमाने पर झेलना पड़ेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के क्षेत्रीय निदेशक ने यह बात कही।
दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय निदेशक सामली प्लीनबांगचांग ने कहा, "सभी जानते हैं कि पिछला दशक तापमान के लिहाज से सबसे ज्यादा गर्म रहा है। दक्षिण पूर्व एशिया को मलेरिया, चिकनगुनिया, डायरिया और अन्य संबंधित समस्याओं का अभी और सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर कहा कि इस क्षेत्र का बड़ा देश होने के नाते भारत में ऐसे रोगियों की संख्या में इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिग मानव स्वास्थ्य पर 'गंभीर और विनाशकारी प्रभाव' डालेगा।
क्षेत्रीय निदेशक के मुताबिक हवा की शुद्धता में गिरावट के कारण बीमारियों में वृद्धि होगी। गर्म हवाओं का प्रकोप बढ़ने से बहुत ज्यादा लोग इससे जनित बीमारियों की चपेट में आएंगे।
क्षेत्रीय उप निदेशक (दक्षिण पूर्व एशिया) पूनम क्षेत्रपाल सिंह ने कहा कि ग्लोबल वार्मिग के कारण दुनियाभर में प्रत्येक साल 22 लाख मौत होती हैं। केवल दक्षिण पूर्व एशिया में 8 लाख लोगों की मौत 2005 में हुई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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