सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ओंकारेश्वर विस्थापितों की जमीन का ब्यौरा

भोपाल, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार से ओंकारेश्वर परियोजना के विस्थापितों को दी जाने वाली जमीन का ब्यौरा मांगा है।

प्रदेश सरकार को जमीन का ब्यौरा 15 अप्रैल तक न्यायालय में प्रस्तुत करना होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन एवं न्यायाधीश आर. वी. रविन्द्रन की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश सरकार को जमीन संबंधी यह आदेश दिये। जिस पर प्रदेश सरकार की ओर से स्वीकारा गया कि वह उच्च न्यायालय के निर्देषों के मुताबित विस्थापितों को जमीन देगी। सरकार द्वारा जमीन का विवरण न्यायालय में प्रस्तुत किये जाने के बाद अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी।

नर्मदा बचाओ आंदोलन के अशोक अग्रवाल और चित्तरूपा पालिक ने बताया है कि न्यायालय ने 21 फरवरी को आदेश दिया था कि ओंकारेश्वर बांध के प्रभावितों और उनके वयस्क पुत्रों को जमीन दी जाए। इस आदेश के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार और नर्मदा हाईड्रोलिक डेवलपमेंट कापरेरेशन ने सर्वोच्च न्यायालय में अलग-अलग याचिका दायर की थी। सोमवार को सुनवाई शुरू होने के वक्त न्यायालय ने माना कि विस्थापितों को जमीन देना जरूरी है ताकि वे बेहतर जिदंगी जी सके ।

खंडपीठ ने कहा है कि जब परियोजना की शुरूआत हुई थी तब जमीन देने की बात कही गयी थी, तो परियोजना बनने पर सरकार उस वादे से मुकर नही सकती । इस पर प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि उसके पास पांच हजार हेक्टेयर जमीन है और वह विस्थापितों को जमीन देने के लिए तैयार है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि विस्थापितों को दी जाने वाली जमीन का ब्यौरा प्रस्तुत किया जाए ।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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