वकालत पर प्रतिबंध को सर्वोच्च न्यायालय ने भी रखा जारी

नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में वकालत करने पर प्रतिबंधित किए गए एक वकील को आज सर्वोच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली।

प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालकृष्णन और न्यायमूर्ति आर. वी. रवींद्रन की खंडपीठ ने झारखंड के वकील के. के. झा के न्यायालय की अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड उच्च न्यायालय के निर्णय को बरकरार रखा।

बीते साल 3 जुलाई को झा पर 'झगड़ालू' होने का आरोप लगा था और उनके खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने झा को राज्य की किसी भी न्यायालय में वकालत करने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर टिप्पणी करते हुए झा ने आईएएनएस से कहा कि यह फैसला उनके संविधान के मौलिक अधिकार से संबंधित अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार को प्रभावित कर रहा है।

गौरतलब है कि झा ने सिविल जज के आदेश को गलत घोषित किया था। झा को न्यायालय की अवमानना के जुर्म में बंदी भी बनाया गया था। उसके बाद झा ने सर्वोच्च न्यायालय में उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील की थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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