उज्जैन में विक्रम संवत के स्वागत की तैयारी पूरी
उज्जैन, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। पवित्र नगरी उज्जैन में विक्रम संवत की पहली सुबह की अगवानी आरती, मंगल गीत और भारतीय वाद्य यंत्रों की गूंजती धुनों के बीच होगी। तमाम विद्वान वैदिक मंत्रोच्चारण करेंगे तो हजारों लोग क्षिप्रा नदी के तट पर सूर्य को अघ्र्य देंगे। इस तरह क्षिप्रा नदी एक बार पुन: नए साल के स्वागत की गवाह बनेगी।
विक्रम संवत का उज्जैन से सीधा नाता है क्योंकि इसकी शुरुआत यहीं से हुई थी। राज्य विक्रमादित्य ने जब यहां का राजपाट संभाला तो उन्होंने अपनी प्रजा के दुखों को कम करने के लिए न केवल सभी कर्ज माफ कर दिए बल्कि एक नए पंचांग को भी जारी किया था। इस पंचांग को विक्रम संवत पंचांग के नाम से जाना गया। कालचक्र का निर्धारण इसी पंचांग के जरिए होता है।
विक्रम संवत का नया संवत्सर 7 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस अवसर पर उज्जैन में कार्यक्रमों की धूम रहेगी। मुख्य समारोह सुबह छह बजे क्षिप्रा नदी के तट पर होगा। जहां पौ फटते ही पहले से वेदपाठ, मंत्रोच्चारण, आरती और पारम्परिक वाद्य यंत्रों की मंगल ध्वनि शुरू हो जायेगी। सूर्योदय होते ही क्षिप्रा तट पर मौजूद लोग अध्र्य देंगे और आने वाले समय में सुख समृद्घि मिले इसकी कामना करेंगे।
ज्योतिषाचार्य आनन्द शंकर व्यास बताते हैं कि नए संवत्सर के स्वागत अवसर पर ध्वज पताका फहरायी जायेगी। वहां मौजूद लोगों को चंदन और कुमकुम का टीका लगाया जायेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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