रेलवे का कमाऊ घोडा क्या पुल और पटरियां तोड कर रहेगा
नई दिल्ली 21 फरवरी .वार्ता. भारतीय रेलवे के कायाकल्प की कहानी में कमाऊ घोडा कही जा रही माल गाडियों पर ज्यादा बो डालने का असर रेलवे के ढांचे पर दिखने लगा है और उसे लाइनों और पुलों की जांच और रखरखाव के लिए आवश्यक कर्मियों और यंत्रों की फिक्र होने लगी है
रेलवे बोर्ड के सदस्य .इंजीनियरिंग . सतीश के विज ने आज कहा कि 25 टन एक्सेल वजन की मालगाडियां चलाने का अनुभव अभी थोडा है पर इससे रेलवे पटरियों के टूटने फूटने और खराब होने की दर बढ गयी है1 श्री विज मालगाडियों का एक्सल वजन बढाने के भारत के अनुभवों पर रेलपथ इंजीनियर्स संस्थान. भारत. द्वारा यहां विज्ञान भवन में आयोजित दो दिन के तकनीकी सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे1 उन्होंने कहा कि यह दुष्प्रभाव लाइनों में खास कर कैंचियों . क्रासिंगों. मोडों. वेल्डिंग के स्थानों पर उस जगह ज्यादा दिख रहा है जो कमजोर होते हैं 1 लाइनों पर वेल्डिंग के चटकने जैसे दोष बढे हैं
उन्होंने कहा कि ..यह समस्या आेवर लोडिंग के कारण भी हो सकती है पर दुनिया के अन्य रेल नेटवकोर्ं में भी ऐसी समस्याएं देखी गयी है1 उल्लेखनीय है कि रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने .. मालगाडियों को रेलवे का कमाऊ घोडे की संज्ञा देते हुए रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को तत्काल बढाने के लिए मालगाडियों का एक्सल भार 20.3 से 22.3 टन और कुछ चुनिंदा मागो पर 22.9 टन कर दिया है1 पांच मागो पर 1000 किलो मीटर नेटवर्क पर 25 टन एक्सल भार की गाडियां भी शुरू की गयी हैं1 रेलवे ने मालगाडियों की गति भी 25 किलो मीटर प्रतिघंटा से बढा कर 75 किलो मीटर कर दी ही 1 खाली गाडियों को 100 किलो मीटर पर चलाया जाने लगा है ताकि ढुलाई तेज हो सके1 मनोहर . शिशिर .अजय प्रेम .1517जारी वार्ता












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