पूर्व बि्रगेडियर की जमानत नामंजूर
नई दिल्ली 21 फरवरी .वार्ता. दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमरीकी राजनयिक को खुफिया जानकारी देने के आरोपी एक पूर्व ब्रिगेडियर को जमानत देने से आज इन्कार कर दिया
न्यायमूर्ति मुरलीधर रेड्डी ने पूर्व बि्रगेडियर उज्जल दासगुप्ता की जमानत याचिका को खारिज कर दिया1 दासगुप्ता ने निचली अदालत में आरोप तय करने में हो रही देरी का हवाला देते हुए उच्च न्यायालय से जमानत का अनुरोध किया था1 उनकी दलील थी कि आरोप तय हुए बिना ही वह 18 महीने जेल में बिता चुके हैं
हालांकि न्यायालय ने दासगुप्ता को थोडी राहत देते हुए निचली अदालत को उनके खिलाफ आरोपों पर अतिशीघ्र बहस कराने और 30 अप्रैल से पहले आरोप तय करने का निर्देश दिया
यह मामला 10 जून 2006 का है1 एस एस पाल नाम के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी और उससे की गई पूछताछ में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय .एनएससीएन. से खुफिया जानकारी की चोरी का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया1 इस आधार पर एनएससीएन के एक अधिकारी मुकेश सैनी को गिरफ्तार किया गया
अभियोजन के अनुसार पूछताछ के दौरान सैनी ने बताया कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग .रा. में कार्यरत दासगुप्ता ने अमरीकी राजनयिक रोसन्ना मिन्चू से नजदीकी बना ली थी और उसे चार पेन ड्राइव और एक सीडी भेजी1 इनमें किसी विशेष कार्ययोजना और अन्वेषक परियोजना से संबंधित खुफिया जानकारी थी
रा ने अपनी दलील में कहा कि अगर यह खुफिया सूचना देश के दुश्मनों के हाथ लग गई तो यह देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकती है
प्रकाश.समरेंद्रसुनील2007वार्ता












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