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डाक्टर सुनील प्रकाश ने कहा कि आज स्थिति यह है कि सरकारी या निजी किसी भी अस्पताल में डाक्टर रोगी की दिमागी तौर पर मृत्यु हो जाने पर उसके परिजनों को उसके अंगदान करने की सलाह देते हुए बेहद सकुचाता है 1 क्योंकि ऐसा कहने पर उसे .. कसाई.. समा जाने लगता है 1 उन्होंने कहा कि इसमें रोगी के परिजनों को दोषी इसलिए नहीं माना जा सकता क्योंकि उन्हें यह पता ही नहीं कि ..ब्रेन डैथ.. क्या होती है
उन्होंने कहा कि अमरीका जैसे विकसित देशों में ऐसा कोई कांड इसलिए प्रकाश में नहीं आता क्योंकि वहां .. ब्रेन डैथ.. के बारे में अग्यानता नहीं है 1 वहां लोग यहां तक कि बच्चे भी जानते हैं कि .. ब्रेन डैथ.. के बाद व्यक्ति मृतप्राय. पडा रह सकता है लेकिन उसका मस्तिष्क पुन. काम करना शु नहीं कर सकता 1 इसलिए वहां लोग अंगदान करने से नहीं हिचकिचाते
अंगदान संबंधी कानून के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सगे संबंधियों के अंग न.न. मिल पाने की स्थिति में भावनात्मक प से जुडे लोगों का जो विकल्प मौजूदा कानून में दिया गया है उसे ठीक किए जाने की जरत है 1 उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा गडबडियों की आशंका इसी प्रावधान के दुपयोग से हो सकती है जिसमें दोस्तों तक के अंग दान का प्रावधान है 1 आरती नरेश सत्या राम1937जारी वार्ता












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