आलू बीज की वैज्ञानिक खेती में बीज की महत्वपूर्ण भूमिका

लुधियाना .14 अक्तूबर .वार्ता. आलू की खेती पर खर्च की जाने वाली कुल रकम की लगभग आधी आलू के बीज पर खर्च होती है1 अगर समय के साथ साथ आलू के बीज में बदलाव नहीं किया जाए तो इससे उपज परभारी असर पडता है

पंजाब में लगभग 75 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती की जातीहै और लगभग 1223 हजार टन इसका उत्पादन होता है 1 पंजाब देश केअन्य राज्यों को आलू का बीज उपलब्ध कराने वाला प्रमुख राज्य बनगया है 1 पंजाब से पश्चिम बंगाल .बिहार. कर्नाटक .महाराष्ट्र औरआंध्र प्रदेश आदि को बीज की आपूर्ति की जाती है

पंजाब कृष िविश्वविद्यालय के सब्जी और पुष्प विभाग केवैज्ञानिक बी के वशिष्ट और जे एस कंवर के अनुसार आलू की स्वस्थखेती के लिए स्वस्थ बीज की महत्वपूर्ण भूमिका है 1 एक ही आलू केबीज के बार बार लगाये जाने से इस पर बीमारियों का प्रकोप बढता औरउपज प्रभावित होता है

वैज्ञानिकों ने किसानों से दस प्रकार के आलू की किस्मों की खेतीबीज के लिये करने की अनुशंसा की है1 इनमें कुफरी चंद्रमुखी 80 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है1 कुफ्री अशोका के तैयार होने में 70 से 80दिन लगते हैं 1 कुखरी पुखराज की फ्सल 70 से 90 दिनों में तैयार होजाती है1 कुफ्री ज्योति के तैयार होने में 90 से 100 दिन का समय लगता है1 कुफ्री बहार और कुफ्री लालीमा की फ्सल 100 से 110 दिन में तैयार होती है 1 कुफ्री ज्वार 70 से 80 दिनें में . कुफ्री सतलुज 90 से100 दिनों में . कुफ्री सिन्दूरी 110 से 120 दिनों में . और कुफ्रीबादशाह 100 से 110 दिनों में तैयार होता है

अरूण बिष्ट रामलाल1604जारी वार्ता

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