Women's Day 2025: मां ने बेटी को Pilot बनाने के लिए बेचा खेत, बिहार की Taiba Afroz की सक्सेस स्टोरी
Taiba Afroz Pilot: बचपन में बिहार की सड़कों पर दौड़ते वाहनों को देख ताईबा अफरोज अक्सर अपने पापा से पूछा करती थी कि ये कार, बाइक और बस कैसे चलती हैं? मैं भी चलाना चाहती हूं।' आज वो ही बेटी पायलट बन गई है। आसमां में हवाई जहाज उड़ाती है।
बिहार के छपरा की ताईबा अफरोज की सक्सेस स्टोरी उन लोगों को मोटिवेट करने वाली है, जो घर की कमजोर आर्थिक के सामने घुटने टेक देते हैं। मेहनत करना छोड़ देते हैं। ताईबा में कुछ कर गुजरने ललक देख मां ने उसे पायलट बनाने के लिए अपना खेत तक बेच दिया।

International Women's Day 2025 (विश्व महिला दिवस 2025) के मौके पर आइए जानते हैं गरीब परिवार की बेटी ताईबा अफरोज संघर्ष व सफलता की पूरी कहानी।
पायलट की ट्रेनिंग कितने दिन की होती है? (How long are pilots in training?)
ताईबा अफरोज कहती है कि एक पायलट की ट्रेनिंग का कोई फिक्स टाइम नहीं होता है, क्योंकि यह प्रक्रिया अभ्यास पर निर्भर होती है। कम से कम 200 घंटे उड़ान भरनी होती है। मतलब 200 घंटे प्लेन उड़ाने का अनुभव होना चाहिए।
कभी-कभी बारिश, आंधी या अन्य वजह से मौसम खराब होता है तो ट्रेनिंग में उड़ान नहीं भर पाते हैं। इसलिए पायलट की ट्रेनिंग का टाइम फिक्स नहीं। हालांकि सब कुछ ठीक रहे तो दो से तीन साल पायलट की पूरी ट्रेनिंग हो जाती है।

पायलट की सैलरी कितनी होती है? (What is a pilot's salary?)
पायलट ताईबा अफरोज के अनुसार ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एक पायलट की शुरुआती सैलरी 1 लाख 50 हजार रुपए प्रतिमाह तक होती है। फिर अनुभव बढ़ने के साथ-साथ सीनियर पायल व कैप्टन के पद पर पदोन्नति मिलती है तो सैलरी भी बढ़ती जाती है।
पायलट ताईबा अफरोज किससे शादी करेगी?
मीडिया से बातचीत में पायलट ताईबा अफरोज कहती हैं कि शादी तो करनी ही है। समय आने पर माता-पिता की पसंद से शादी करूंगी। मेरा दूल्हा दारोगा या फिर कोई पायलट? इस बारे में अभी सोचा ही नहीं।

किसी कंपनी का प्लेन उड़ाएगी ताईबा अफरोज?
पायलट ताईबा अफरोज का मानना है कि एक पायलट की अपनी पसंद की कोई विमान कंपनी नहीं होनी चाहिए। उसे बस सुरक्षित व सफलतापूर्वक हवाई जहाज उड़ाने से मतलब हो। फिर चाहे वो एयर इंडिया का हो या फिर इंडिगो या अन्य किसी विमान कंपनी का।
पायलट बनने के लिए क्या करना पड़ता है?
ताईबा अफरोज कहती हैं कि पायलट बनने के लिए कम से कम 12वीं तक की पढ़ाई जरूरी है। इंटर करने के बाद पायलट बनने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन के पांच थ्योरी पेपर होते है, जिन्हें पास करने के लिए 70 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। उसके बाद 200 घंटे प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। जब पायलट बनने का लाइसेंस मिलता है।

मुस्लिम होने की वजह से ड्रेस पर आपत्ति
ताईबा अफरोज हैं कि वो मुस्लिम होने के कारण पायलट बनकर पेंट-शर्ट पहनी तो कई लोगों ने कमेंट किया कि हमारे धर्म में यह सब पहनने की इजाजत नहीं है। कमेंट सुनने को तो मिले, मगर मेरे टैलेंट और काम का ड्रेस कोड पेंट शर्ट है तो बुर्का क्यों पहनूं?
100 घंटे अकेले उड़ाया जहाज
मीडिया से बातचीत में ताईबा अफरोज ने कहा कि 200 घंटे की ट्रेनिंग के दौरान 100 घंटे उन्होंने अकेले जहाज उड़ाया है जबकि शेष 100 घंटे की उड़ान में प्रशिक्षक साथ में थे। जहाज को सिर्फ उड़ाना ही नहीं होता बल्कि सही डायरेक्शन में सुरक्षित उतारना भी जरूरी है। प्लेन उड़ाते कभी डर नहीं लगा।

पिता न बेटी की पढ़ाई को बनाया मिशन
ताईबा अफरोज बिहार के छपरा में साधारण परिवार से हैं। पिता राशन की दुकान चलाते थे। कोरोना महाकारी में दुकान बंद हो गई। पिता खुद भी कोरोना की चपेट में आ गए थे। फिर बेटी ताईबा की पढ़ाई और उसकी कामयाबी को ही मिशन बना लिया। बोले कि पहले बेटी को पायलट बना दूं फिर कोई काम धंधा करूंगा।
छोटी बहन खान सर के पास कर रही तैयारी
पायलट ताईबा अफरोज के भाई नहीं है। एक छोटी बहन है, जो पटना में खान सर के पास बीपीएससी की तैयारी कर रही है। मां हाउसवाइफ है।
ताईबा अफरोज ने कहां से ली पायलट की ट्रेनिंग
साल में 2020 में ताईबा ने गवर्नमेंट एविएशन ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट भुवनेश्वर ओडिशा से ट्रेनिंग ली। उधर, ताईबा की मां ने कहा कि लोग तो जमीन बेचकर बेटियों की शादी करती हैं जबकि जमीन बेचकर बेटी को पढ़ाया है। वो ही बेटी आज पायलट बन गई है।
ताईबा अफरोज का सपना क्या है?
पायलट ताईबा अफरोज कहती हैं कि उनके माता-पिता अभी कभी प्लेन में नहीं बैठे हैं। ख्वाहिश है कि जिस प्लेन को वह चला रही हो उसमें पीछे उसके माता-पिता भी बैठे हो।
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