Success Story: पिता की मौत के बाद मां ने नरेगा में मजदूरी करके बेटे को बनाया नेवी अफसर
Motivational story of Shubham Narwal NDA: शुभम नरवाल वो लड़का है, जिसने बचपन में पिता को तो खो दिया, मगर उसके बाद मां ने हौसला नहीं खोने दिया। अनपढ़ मां खुद मेहनत-मजदूरी करके बेटे को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया।
मां के प्रयासों और शुभम की लगन का नतीजा ये रहा कि अब यह भारतीय नौसेना में अफसर बन गया है। वो भी गांव में रहकर बिना किसी कोचिंग की, क्योंकि एनडीए की तैयारी के लिए कोचिंग की ओर उठते कदम गरीबी ने रोक दिए थे।

अपने गांव से नेवी के पहले अफसर बने शुभम नरवाल की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो तरक्की की राह में परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को रोड़ा मानते हैं। मेहनत करने की बजाय हालात को कोसते हैं।
शुभम नरवाल राजस्थान के झुंझुनूं जिले की खेतड़ी तहसील के गांव बाड़लावास का रहने वाला है। शुभम ने बताया कि साल 2015 में उसकी पिता की कैंसर की वजह से मौत हो गई थी। तब शुभम पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा था।
तीन बड़ी बहनों का इकलौता भाई शुभम कहता है कि NDA में सफलता हासिल करने का पूरा श्रेय मां को देता हूं, क्योंकि मां अनपढ़ है। इसके बावजूद जिद करके उसका गांव से 15 किलोमीटर दूर स्थित अंग्रेजी माध्यम के स्कूल स्वामी विवेकानंद में दाखिला करवाया।
शुभम को पढ़ाने के लिए मां ने खेतों और मनरेगा में मजदूरी की, मगर बेटे की पढ़ाई नहीं रुकने दी। शुभम ने दसवीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि उसे आर्मी में अफसर बनना है। एनडीए की कोचिंग करने चंडीगढ़ गया, मगर फीस के तीन हजार रुपए नहीं होने की वजह घर लौट आया।
शुभम नरवाल की सक्सेस स्टोरी रिटायर्ड मेजर जनरल यश मोर ने अपने यूट्यूब चैनल Maj Gen Yash Mor पर शेयर की है। मोर साहब से बात करते हुए शुभम ने बताया कि घर आने के बाद उसने एनडीए की तैयारी करवाने वालों के वीडियो देखकर तैयारी की। कहीं से कोई ऑफलाइन व ऑनलाइन कोचिंग नहीं ली।
शुभम ने बताया कि दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। एक बड़ी बहन अविवाहित है। मां ने सबको मजदूरी करके पाला। नरेगा में रोजाना के 220 रुपए मिलते हैं। साल में सिर्फ 100 दिन रोजगार। बाकी दिनों में खेतों में मजदूरी की।












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